NCLT से मिली मंज़ूरी, मर्जर का रास्ता साफ
Deep Industries के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने Kandla Energy and Chemicals Limited (KECL) के साथ इसके पूर्ण विलय (merger) को अंतिम मंजूरी दे दी है। NCLT की अहमदाबाद बेंच ने 23 मार्च, 2026 को अपना आदेश जारी किया, जिससे कंपनी की KECL के संचालन को अपने में समाहित करने की योजना पूरी हो गई है।
लागत घटाने और सप्लाई चेन मजबूत करने का लक्ष्य
इस मर्जर का मुख्य उद्देश्य Deep Industries के कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को सरल बनाना और संचालन को सुव्यवस्थित करना है। KECL की केमिकल और हाइड्रोकार्बन फ्लूइड्स बनाने की क्षमताओं को सीधे Deep Industries में एकीकृत करने से कंपनी को अपनी सप्लाई चेन पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे उत्पादन लागत में कमी आएगी, आवश्यक इनपुट्स की सप्लाई अधिक विश्वसनीय होगी और लाभ मार्जिन (profit margins) में भी वृद्धि हो सकती है।
शानदार रहे FY25 के नतीजे
यह मर्जर ऐसे समय में हुआ है जब Deep Industries ने फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में मजबूत वित्तीय परिणाम दर्ज किए हैं। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 35% बढ़कर ₹576.1 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट 31.6% की वृद्धि के साथ ₹161 करोड़ तक पहुंच गया। EBITDA में भी 35.3% का इजाफा देखा गया और यह ₹263.8 करोड़ दर्ज किया गया।
अधिग्रहण की पृष्ठभूमि
Deep Industries ने KECL का अधिग्रहण 31 मार्च, 2025 को सिर्फ ₹1 लाख में किया था, जब यह NCLT के तहत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया में थी। KECL, जो 2005 में स्थापित हुई थी, Deep Industries को आवश्यक केमिकल और हाइड्रोकार्बन फ्लूइड्स की आपूर्ति करती है। FY25 में KECL की कुल संपत्ति लगभग ₹215 करोड़ और आय ₹38.5 लाख थी, जबकि Deep Industries की संपत्ति लगभग ₹1,820 करोड़ और आय ₹515 करोड़ बताई गई है।
जोखिम और आगे की राह
हालांकि, निवेशकों को कुछ संभावित जोखिमों पर भी नजर रखनी होगी। Deep Industries को 13 फरवरी, 2026 को ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) से एक प्रोविजनल सस्पेंशन (provisional suspension) का सामना करना पड़ रहा है, जिसके खिलाफ कंपनी अपनी बात रखेगी। इसके अलावा, SEBI 2015 के मध्य से Deep Industries के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग (insider trading) के आरोपों की जांच कर रहा है। जनवरी 2026 में एक गैस लीक की घटना को सुरक्षित रूप से नियंत्रित कर लिया गया था।
निवेशक अब ONGC के मामले के समाधान और KECL के संचालन के सफल एकीकरण पर बारीकी से नजर रखेंगे।
