DHP India Ltd को वितीय वर्ष 2026 के लिए ₹4,49,580 (लगभग ₹4.5 लाख) का भारी जुर्माना भरना पड़ा है। यह जुर्माना कंपनी की एनुअल सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट में सामने आई विभिन्न चूकों के कारण लगाया गया है, जिसे Sushil Tiwari & Associates ने तैयार किया है।
इन चूकों में मुख्य रूप से मार्च 2024 और मार्च 2025 जैसी महत्वपूर्ण रेगुलेटरी फाइलिंग्स को जमा करने में हुई देरी शामिल है। इसके अलावा, कंपनी में एक 59-दिन की अवधि ऐसी भी रही जब कोई इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त नहीं था, जो कि एक गंभीर गवर्नेंस लैप्स माना जाता है।
कंपनी ने साफ किया है कि यह जुर्माना 'अंडर प्रोटेस्ट' (Under Protest) जमा किया गया है, जिसका मतलब है कि कंपनी संभावित रूप से इन पेनल्टी पर आपत्ति जता सकती है या आगे इस पर स्पष्टीकरण मांग सकती है।
इस तरह की कंप्लायंस में कमी निवेशकों के भरोसे को डिगा सकती है, क्योंकि वे कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स और रेगुलेटरी पालन की क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। यह स्थिति कंपनी पर भविष्य में और अधिक जांच का दबाव बना सकती है।
DHP India ने आश्वासन दिया है कि वह अपनी कंप्लायंस प्रोसीजर को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी देरी से बचा जा सके और गवर्नेंस के मानकों का सख्ती से पालन हो सके। कंपनी का पिछला रिकॉर्ड भी इस मामले में मजबूत रहा है, जैसे कि FY2020 और FY2022 के लिए एनुअल कंप्लायंस रिपोर्ट्स में कोई रेगुलेटरी एक्शन नहीं लिया गया था।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि DHP India इंडस्ट्रियल और एनर्जी इक्विपमेंट सेक्टर में काम करती है, जहां Integra Engineering India Ltd, ITL Industries Ltd, और Confidence Petroleum India Ltd जैसी कंपनियां भी समान रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना करती हैं।