DCI में नेतृत्व परिवर्तन
ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DCI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कैप्टन एस. दिवाकर को नया मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (MD & CEO) नियुक्त करने की घोषणा की है। यह नियुक्ति 25 मार्च 2026 से लागू होगी। DCI की नॉमिनेशन और रेमुनरेशन कमेटी के साथ-साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है।
58 वर्षीय कैप्टन दिवाकर के पास इंडस्ट्री का 38 साल का गहरा अनुभव है, जिसमें 22 साल समुद्री सफर और 16 साल मैनेजमेंट के अनुभव शामिल हैं। वर्तमान में, वह DCI के 99 शेयर रखते हैं। उम्मीद है कि उनके अनुभव से कंपनी की स्ट्रेटेजिक दिशा और ऑपरेशनल निरंतरता को मजबूती मिलेगी।
कंपनी की पृष्ठभूमि
साल 1976 में एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) के तौर पर स्थापित DCI का मुख्य काम भारतीय बंदरगाहों की सेवा करना रहा है। साल 2019 में भारत सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जिसके बाद प्रमुख बंदरगाहों जैसे विशाखापत्तनम, पारादीप, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट इसके मालिक बन गए। साल 1987 से DCI का हिस्सा रहे कैप्टन दिवाकर ने ड्रेजर मास्टर से लेकर सीनियर मैनेजमेंट तक कई अहम पदों पर काम किया है। हाल ही में कंपनी में कुछ अन्य बोर्ड बदलाव भी हुए हैं, जिसमें एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर का जाना और दूसरे का जुड़ना शामिल है। DCI ने अगले पांच से छह सालों में ₹3,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
नेतृत्व की राह
कैप्टन एस. दिवाकर, जिनके पास DCI का लंबा और गहरा अनुभव है, शुरुआत में एक अतिरिक्त डायरेक्टर के तौर पर काम करेंगे। उनकी नॉन-इंडिपेंडेंट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर स्थायी नियुक्ति आगामी जनरल मीटिंग में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी पर निर्भर करेगी।
प्रमुख चुनौतियाँ और जोखिम
कंपनी के सामने कुछ संभावित गवर्नेंस इश्यूज भी हैं, जिन्हें कंपनी के पूर्व एमडी के निलंबन और बर्खास्तगी के मामलों से याद किया जाता है, जिन पर जालसाजी और अपनी योग्यताएं गलत बताने के आरोप लगे थे। वित्तीय मोर्चे पर, DCI ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही में ₹24.63 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया और रेवेन्यू में 14.9% की गिरावट देखी गई। इस गिरावट का आंशिक कारण लिक्विडेटेड डैमेजेज और फॉरेन एक्सचेंज लॉसेस थे। ड्रेजिंग ऑपरेशंस से जुड़े पर्यावरणीय जोखिम, जैसे प्रदूषण और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव, भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
बाजार में स्थिति
DCI एक विशेष क्षेत्र में काम करती है, मुख्य रूप से भारतीय सरकारी बंदरगाहों की सेवा करती है और इन सुविधाओं पर मेंटेनेंस ड्रेजिंग में 80% से अधिक मार्केट शेयर रखती है। नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स लिमिटेड जैसी कंपनियां संबंधित समुद्री इंजीनियरिंग सेवाओं में शामिल हैं, लेकिन DCI का पब्लिक सेक्टर मैंडेट और राष्ट्रीय बंदरगाह इंफ्रास्ट्रक्चर पर इसका फोकस इसे अलग बनाता है।
आगे की राह
आगामी जनरल मीटिंग में शेयरहोल्डर्स द्वारा कैप्टन एस. दिवाकर की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर नियमित नियुक्ति को मंजूरी मिलना एक अहम घटनाक्रम होगा। निवेशक नए नेतृत्व में DCI के वित्तीय प्रदर्शन और ₹3,000 करोड़ के रेवेन्यू ग्रोथ टारगेट की ओर उसकी प्रगति पर भी नजर रखेंगे। कंपनी गवर्नेंस संबंधी पिछली चिंताओं और वर्तमान वित्तीय दबावों को कैसे संबोधित करती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
