दमदार नतीजों के पीछे की कहानी
Cochin Shipyard ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अपने कंसोलिडेटेड नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का टैक्स के बाद शुद्ध मुनाफा (Consolidated PAT) ₹716.74 करोड़ रहा, जबकि कंसोलिडेटेड कुल आय ₹5,431.69 करोड़ दर्ज की गई। इससे पहले, कंपनी ने ₹999.03 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) भी दिखाया था। स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर भी नतीजे मजबूत दिखे, जिसमें PAT ₹643.04 करोड़ और कुल आय ₹4,712.26 करोड़ रही। इन शानदार नतीजों के दम पर, कंपनी के डायरेक्टर्स ने ₹1.50 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है, जो शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
भारत के डिफेंस शिपबिल्डिंग में अहम भूमिका
Cochin Shipyard भारत के रक्षा जहाज़ निर्माण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है। इसने स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS Vikrant की डिलीवरी में मुख्य भूमिका निभाई है। मार्च 2023 में, कंपनी को इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए छह नेक्स्ट-जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स (NGOPVs) का एक बड़ा ऑर्डर भी मिला था, जिसने इसके ऑर्डर बुक को और मजबूत किया है। कंपनी ऐतिहासिक रूप से शिपबिल्डिंग और रिफिट कॉन्ट्रैक्ट्स के दम पर लगातार वित्तीय ग्रोथ दिखाती आई है।
सिर पर मंडरा रहे बड़े खतरे!
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद, Cochin Shipyard दो गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। पहला, अंडमान और निकोबार एडमिनिस्ट्रेशन के लिए दो 1200-पैसेंजर जहाजों का निर्माण रुका हुआ है। इन जहाजों के निर्माण को फिर से शुरू करने के लिए संशोधनों और कमर्शियल शर्तों पर समझौते की आवश्यकता है। इससे जहाजों के पुराने होने और बैंक गारंटी की समय-सीमा जैसी वित्तीय दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं, जिनकी अनुमानित लागत ₹1,124.12 करोड़ है।
दूसरी बड़ी चिंता यह है कि कंपनी अभी भी बोर्ड कंपोजिशन (Board Composition) के नियमों का पालन नहीं कर रही है। इसके चलते ऑडिट कमेटी (Audit Committee) और नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी (Nomination & Remuneration Committee) जैसी महत्वपूर्ण कमेटियां अनुपस्थित हैं, जो कंपनी के गवर्नेंस में एक बड़ी कमी को दर्शाता है।
इंडस्ट्री में बाकी खिलाड़ी
Cochin Shipyard, Mazagon Dock Shipbuilders (MDL) और Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) जैसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। ये सभी कंपनियां भारत के नौसैनिक जहाज़ निर्माण और रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं और 'मेक इन इंडिया' जैसी सरकारी पहलों से लाभान्वित हो रही हैं। MDL और GRSE के पास भी मजबूत ऑर्डर बुक हैं, जो घरेलू रक्षा निर्माण में बढ़ती मांग का संकेत देते हैं।