एनर्जी स्टोरेज में CIL का बड़ा कदम
यह प्रोजेक्ट कोल इंडिया के लिए सिर्फ एक नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि कोयला खनन से इतर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर में स्ट्रैटेजिक डाइवर्सिफिकेशन (Strategic Diversification) का संकेत है। BESS प्लांट रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने और ग्रिड को स्थिर रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए CIL अपने रेवेन्यू स्ट्रीम्स (Revenue Streams) को बढ़ाना चाहता है और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है।
प्रोजेक्ट की खास बातें
इस प्लांट की कुल कैपेसिटी 320 MWh होगी, जो 80 MW की पावर 4 घंटे तक सप्लाई कर सकेगी। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित कॉस्ट ₹400 करोड़ है। CIL को लेटर ऑफ अवार्ड (LOA) मिलने के 20 दिनों के अंदर जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे, और बैटरी एनर्जी स्टोरेज परचेज एग्रीमेंट (BESPA) साइन होने के 18 महीने के भीतर इस प्लांट को पूरा करना होगा। इस प्रोजेक्ट का अनाउंसमेंट 30 अप्रैल, 2026 को हुआ है।
CIL के रिन्यूएबल और स्टोरेज सपने
कोल इंडिया कोयले पर अपनी निर्भरता कम करके सस्टेनेबल एनर्जी फ्यूचर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी ने रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाने के बड़े लक्ष्य रखे हैं, जिसमें 2027-28 तक 3 GW और 2029-30 तक 9.5 GW हासिल करने की योजना है। ओडिशा का यह BESS प्रोजेक्ट CIL की पिछली सफलताओं का ही हिस्सा है, जिसमें SECI ऑक्शन और तेलंगाना में TSGENCO के साथ ₹1,057 करोड़ का 750 MWh का प्रोजेक्ट शामिल है।
आगे क्या?
निवेशक और स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) अब CIL द्वारा जरूरी डॉक्यूमेंटेशन और BESPA साइन करने की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। 18 महीने की तय समय-सीमा में प्लांट का कंस्ट्रक्शन और कमिशनिंग (Commissioning) कंपनी की एफिशिएंसी का बड़ा पैमाना होगा। इसके अलावा, CIL के भविष्य में एनर्जी स्टोरेज या रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़े अन्य टेंडर्स (Tenders) में हिस्सा लेने की घोषणाओं पर भी सबकी नजर रहेगी।
इंडस्ट्री में क्या चल रहा है?
कोल इंडिया का BESS में डाइवर्सिफिकेशन, देश की अन्य बड़ी एनर्जी कंपनियों के ट्रेंड के अनुरूप है। NTPC, टाटा पावर (Tata Power) और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस (Adani Energy Solutions) भी रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज में भारी निवेश कर रहे हैं, ताकि भारत के क्लीन एनर्जी मिशन और ग्रिड मॉडर्नाइजेशन (Grid Modernization) का फायदा उठाया जा सके।
