कर्ज चुकाने और कामकाज को मजबूती
कंपनी के बोर्ड की 24 अप्रैल, 2026 को होने वाली मीटिंग से पहले यह अहम घोषणा की गई है। Century Extrusions इस राइट्स इश्यू के जरिए ₹4,500 लाख यानी ₹45 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इस रकम में से ₹1,400 लाख (₹14 करोड़) का इस्तेमाल अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loans) चुकाने के लिए किया जाएगा, जबकि ₹2,000 लाख (₹20 करोड़) वर्किंग कैपिटल को बढ़ाने में लगाए जाएंगे, जिससे मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स को और बेहतर किया जा सके।
कंपनी पर कितना है कर्ज?
31 दिसंबर, 2025 तक कंपनी पर कुल ₹5,600 लाख (₹56 करोड़) का टोटल बरोइंग्स (Borrowings) या कर्ज बाकी था। इस राइट्स इश्यू से जुटाई गई राशि कंपनी के फाइनेंशियल स्ट्रेन को कम करेगी और ब्याज के खर्चों में कटौती करके प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को बढ़ाने में मदद कर सकती है।
निवेशक और शेयरहोल्डर पर असर
मौजूदा शेयरहोल्डर्स को इस राइट्स इश्यू में नए शेयर खरीदने का मौका मिलेगा, जिससे वे अपनी हिस्सेदारी बनाए रख सकते हैं या बढ़ा सकते हैं। हालांकि, जो शेयरहोल्डर इसमें हिस्सा नहीं लेंगे, उनकी स्वामित्व प्रतिशत में थोड़ी कमी आ सकती है। कंपनी का इरादा अनसिक्योर्ड लोन को कम करके अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करना है।
प्रमुख जोखिम और चिंताएं
Century Extrusions के सामने कुछ अहम जोखिम भी हैं। कंपनी कच्चे माल की सप्लाई पर निर्भर है, जिससे उत्पादन में रुकावट आ सकती है। इसके अलावा, एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। एक बड़ी चिंता प्रमोटर (Promoter) का अतीत भी है, जिनका संबंध पहले एक नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) वाली कंपनी से रहा है। कंपनी पर ₹5,600 लाख का मौजूदा कर्ज भी फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी के लिए एक जोखिम बना हुआ है।
कंपनी का बैकग्राउंड और वित्तीय स्थिति
Kolkata की Century Extrusions, जो 1988 में स्थापित हुई थी, एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न और संबंधित प्रोडक्ट्स की एक अहम निर्माता है। इसके प्रोडक्ट्स आर्किटेक्चर, ऑटोमोटिव, डिफेंस जैसे कई सेक्टरों में इस्तेमाल होते हैं। कंपनी ने Q3 FY26 में ₹122.53 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹2.90 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। वहीं, 31 दिसंबर, 2025 तक नौ महीनों में कंपनी का कुल इनकम ₹33,675 लाख और नेट प्रॉफिट ₹802 लाख रहा था, जबकि कुल बरोइंग्स ₹5,600 लाख थी।
आगे क्या देखें?
निवेशकों की नजर अब बोर्ड द्वारा राइट्स इश्यू की प्राइस (Price) और शर्तों को फाइनल किए जाने पर होगी। मार्केट की प्रतिक्रिया और सब्सक्रिप्शन (Subscription) का लेवल अहम होगा। साथ ही, यह देखना भी ज़रूरी होगा कि कंपनी जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और वर्किंग कैपिटल बढ़ाने में कितनी प्रभावी ढंग से करती है।
