Capacit'e Infraprojects Limited को इनकम टैक्स विभाग से एक बड़ा झटका लगा है। कंपनी को असेसमेंट ईयर 2024-25 (जो फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के लिए है) के तहत ₹10.18 करोड़ के टैक्स डिमांड का नोटिस मिला है। इस डिमांड में प्रिंसिपल टैक्स (Principal Tax) और इंटरेस्ट (Interest) दोनों शामिल हैं।
क्यों आया टैक्स का नोटिस?
यह डिमांड कंपनी द्वारा पहले क्लेम किए गए कुछ एक्सपेंडिचर (Expenses) और डिडक्शन्स (Deductions) को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा डिसअलाउ (Disallow) किए जाने के कारण आई है। इसका मतलब है कि डिपार्टमेंट का मानना है कि इन खर्चों या कटौतियों पर टैक्स से छूट नहीं मिलनी चाहिए, जिससे कंपनी की टैक्सेबल इनकम (Taxable Income) बढ़ जाती है और टैक्स लायबिलिटी (Tax Liability) भी।
कंपनी का क्या कहना है?
Capacit'e Infraprojects ने साफ किया है कि वह इस ऑर्डर के खिलाफ अपील (Appeal) करेगी। कंपनी अपने कानूनी पक्ष को लेकर आश्वस्त है और उसका मानना है कि इस टैक्स डिमांड का उसके मौजूदा बिजनेस ऑपरेशंस (Business Operations) या फाइनेंशियल हेल्थ (Financial Health) पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पिछले टैक्स सर्वे का भी हुआ है जिक्र
यह पहली बार नहीं है जब कंपनी टैक्स अथॉरिटीज के रडार पर आई है। 2022 के आखिर में, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कंपनी के ऑफिसों पर सर्वे (Survey) भी किया था, जो उनके फाइनेंसियल रिपोर्टिंग और ऑपरेशंस पर फोकस को दर्शाता है।
संभावित जोखिम और आगे क्या?
हालांकि कंपनी को अपनी अपील पर भरोसा है, लेकिन एक जोखिम यह भी है कि अपील सफल न हो और ₹10.18 करोड़ की यह डिमांड बरकरार रखी जाए। लंबी कानूनी प्रक्रिया से संसाधनों पर असर पड़ सकता है या अनिश्चितता पैदा हो सकती है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की अन्य बड़ी कंपनियां जैसे Larsen & Toubro, PNC Infratech, KNR Constructions और HG Infra Engineering भी अक्सर ऐसे जटिल टैक्स मामलों से निपटती हैं।
निवेशक अब Capacit'e Infraprojects के अगले कदमों पर बारीकी से नजर रखेंगे, खासकर अपील दाखिल करने और उसके परिणाम पर।
