कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि यह उनके इतिहास की सबसे मजबूत तिमाही रही है।
इस शानदार नतीजे में भारत ऑपरेशन्स का बड़ा हाथ रहा, जहाँ 15% की तगड़ी ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं, एक्सपोर्ट्स में धीमी, सिंगल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिली, जिसका कारण वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन को बताया गया है। दूसरी ओर, यूरोप में रीस्ट्रक्चरिंग के बाद कंपनी के मार्जिन सुधरकर 15.7% पर पहुंच गए हैं।
आगे की प्लानिंग की बात करें तो, CIE Automotive India 2026 फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹4 बिलियन से ₹5 बिलियन का बड़ा कैपेक्स (Capital Expenditure) करने जा रही है। इस निवेश से नई कैपेसिटी बढ़ाई जाएगी, जिसमें तीन नई फोर्जिंग लाइन्स और अतिरिक्त स्टैंपिंग व आयरन कास्टिंग फैसिलिटीज शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य इंडस्ट्री से 3-5% तेज ग्रोथ हासिल करना है।
हालांकि, दूसरी तिमाही (Q2) में एल्युमीनियम की बढ़ती कीमतों का असर मार्जिन पर पड़ सकता है, क्योंकि कंपनी तुरंत इसे कस्टमर्स पर पास-ऑन नहीं कर पा रही है। कस्टमर ऑर्डर कैंसलेशन की वजह से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) प्रोडक्ट्स के वॉल्यूम पर भी असर देखा गया है। इसके अलावा, कंपनी अपनी भारतीय ऑपरेशन्स को पेरेंट एंटिटी में मर्ज करने की संभावना भी तलाश रही है, जो ग्रुप के बड़े कंसॉलिडेशन का संकेत हो सकता है।
अब इन्वेस्टर्स की नजरें कैपेक्स एग्जीक्यूशन, नए ऑर्डर्स (खासकर EV सेक्टर से), एल्युमीनियम कॉस्ट मैनेजमेंट और संभावित मर्जर की प्रगति पर रहेंगी।
