NCLT ने अपने फैसले में कहा है कि Mittal Pollypacks द्वारा Burnpur Cement Limited से जुड़ा जो मामला उठाया गया है, उसमें एक 'वास्तविक और बड़ा विवाद' (genuine and substantial dispute) मौजूद है। इसी आधार पर ट्रिब्यूनल ने दिवालियापन की अर्जी को खारिज कर दिया है।
Mittal Pollypacks ने Burnpur Cement पर कुल ₹2.25 करोड़ से ज्यादा की रकम बकाया होने का दावा किया था। इसमें ₹1.25 करोड़ का मूलधन और ब्याज शामिल था, जो जनवरी 2016 से दिसंबर 2016 के बीच कथित तौर पर की गई सप्लाइज के लिए था। NCLT के इस फैसले से Burnpur Cement को तत्काल दिवालियापन की कार्यवाही के खतरे से मुक्ति मिल गई है, जिससे कंपनी अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी।
कंपनी का पिछला इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब Burnpur Cement को ऐसी किसी अर्जी का सामना करना पड़ा हो। कंपनी पहले भी वित्तीय अनियमितताओं और विवादों से जूझती रही है। जनवरी 2019 में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) की जांच में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई थीं, जिसके बाद अक्टूबर 2019 में UV Asset Reconstruction Co Ltd ने प्रबंधन संभाला था। इस दौरान कंपनी पर फंड की हेराफेरी के भी आरोप लगे थे। सितंबर 2022 में भी Prarthana Sales Pvt Ltd और Narsingh Mercantile Pvt Ltd द्वारा दायर की गई एक दिवालियापन अर्जी को NCLT ने खारिज कर दिया था, जिसमें समय-सीमा (limitation) और फंड की हेराफेरी जैसे मुद्दों को आधार बनाया गया था।
आगे क्या?
NCLT द्वारा याचिका खारिज होने से Burnpur Cement को परिचालन में स्थिरता मिली है। हालांकि, Mittal Pollypacks द्वारा उठाए गए विवाद के मूल मुद्दों, जैसे कि लेन-देन की प्रामाणिकता और भुगतान संबंधी दावों को सुलझाने के लिए कंपनी को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं। निवेशक अब कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और परिचालन क्षमता पर नजर रखेंगे।
