Bondada Engineering Share: निवेशकों की मौज! FY26 में कंपनी का प्रॉफिट **86%** उछला, रेवेन्यू **80%** बढ़ा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Bondada Engineering Share: निवेशकों की मौज! FY26 में कंपनी का प्रॉफिट **86%** उछला, रेवेन्यू **80%** बढ़ा
Overview

Bondada Engineering Ltd. ने FY26 के लिए दमदार वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **86.5%** की बंपर बढ़ोतरी के साथ **₹211 करोड़** पर पहुंच गया, जबकि रेवेन्यू **80.4%** उछलकर **₹2,851 करोड़** दर्ज किया गया। हालांकि, इन्वेंटरी (Stock) और शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग्स (छोटे कर्ज़) में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं।

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FY26 में Bondada Engineering Ltd. का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा, जिसने निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹211.08 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹113.17 करोड़ की तुलना में 86.51% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। वहीं, कंपनी का टोटल रेवेन्यू भी 80.43% की छलांग लगाकर ₹1,580.14 करोड़ से ₹2,851.10 करोड़ तक पहुंच गया।

इस शानदार साल के अंत में, FY26 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे भी सकारात्मक रहे। इस क्वार्टर में कंसॉलिडेटेड टोटल इनकम 27.66% बढ़कर ₹916.20 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट ₹62.88 करोड़ दर्ज किया गया। पूरे साल के लिए Earnings Per Share (EPS) में भी बड़ा सुधार देखा गया, जो ₹10.13 से बढ़कर ₹18.28 हो गया। कंपनी के स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड नतीजों को ऑडिटरों से क्लीन चिट यानी अनमॉडिफाइड ओपिनियन मिला है।

हालांकि, इन बेहतरीन नतीजों के बीच, निवेशकों का ध्यान कंपनी के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट (Working Capital Management) पर भी जाएगा। कंपनी की इन्वेंटरीज़ (Stock) FY25 के ₹201.02 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹536.34 करोड़ हो गई हैं, जो कि एक बड़ी बढ़ोतरी है। साथ ही, शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग्स (छोटे कर्ज़) भी ₹166.56 करोड़ से बढ़कर ₹259.47 करोड़ हो गई हैं। यह बढ़ोतरी वर्किंग कैपिटल की बढ़ती जरूरत और संभावित रूप से बढ़ी हुई फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) का संकेत दे सकती है, जिस पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।

2012 में स्थापित Bondada Engineering, मुख्य रूप से टेलीकॉम और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर्स के लिए ईपीसी (EPC) और ओ एंड एम (O&M) सेवाएं देती है। कंपनी के बिजनेस में सोलर ईपीसी, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं। इसके ऑपरेशन्स के बड़े स्केल-अप और मजबूत डिमांड के चलते यह ग्रोथ संभव हुई है।

31 मार्च 2025 तक, कंपनी के पास ₹5,044 करोड़ का ऑर्डर बुक था, जिसमें मई 2025 में आंध्र प्रदेश सरकार से मिला ₹9,000 करोड़ का बड़ा सोलर ईपीसी प्रोजेक्ट भी शामिल है। कंपनी अपने एक्सपैंशन (Expansion) के लिए ₹185 करोड़ तक की फंडरेज़िंग (Fundraising) भी कर रही है।

आगे चलकर, निवेशक कंपनी की इन्वेंटरी को बेहतर ढंग से मैनेज करने और वर्किंग कैपिटल के कुशल उपयोग पर ध्यान देंगे। साथ ही, बढ़े हुए शॉर्ट-टर्म डेट (Short-term Debt) को कैसे चुकाया या रीफाइनेंस किया जाएगा, यह भी अहम होगा। बड़े प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन (Execution) की गति, मार्जिन परफॉर्मेंस और भविष्य में नए ऑर्डर मिलने की संभावनाओं पर भी नजर रहेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.