Balkrishna Paper Mills नई राह पर! रियल एस्टेट में उतरेगी कंपनी, ग्रुप से लेगी **₹100 करोड़** का लोन

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Balkrishna Paper Mills नई राह पर! रियल एस्टेट में उतरेगी कंपनी, ग्रुप से लेगी **₹100 करोड़** का लोन
Overview

Balkrishna Paper Mills Ltd अपने बिजनेस में एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। कंपनी अब रियल एस्टेट डेवलपमेंट के क्षेत्र में कदम रखने जा रही है। इसके साथ ही, बोर्ड ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 और 2027-28 के लिए ग्रुप की संबंधित कंपनियों से **₹100 करोड़** तक के इंटर कॉर्पोरेट डिपॉजिट्स (ICDs), यानी एक तरह के लोन, लेने की मंजूरी भी दे दी है। यह कदम कंपनी के सामने आ रही वित्तीय चुनौतियों, जैसे पिछले कुछ सालों से हो रहे नुकसान और निगेटिव नेट वर्थ, के बीच उठाया गया है।

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रियल एस्टेट में Balkrishna Paper Mills की एंट्री

Balkrishna Paper Mills Ltd के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कंपनी के कामकाज का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। अब कंपनी रियल एस्टेट डेवलपमेंट और इससे जुड़े कामों में अपनी किस्मत आजमाएगी। इस बड़े फैसले के साथ ही, बोर्ड ने शेयरधारकों से मंजूरी लेकर ग्रुप की अन्य कंपनियों से ₹100 करोड़ तक का इंटर कॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) लेने की योजना को भी हरी झंडी दे दी है।

लोन की पूरी डिटेल

यह लोन दो अलग-अलग कंपनियों से लिया जाएगा। SP Finance and Trading Limited से हर फाइनेंशियल ईयर में ₹25 करोड़ और Sanchna Trading and Finance Limited से भी हर फाइनेंशियल ईयर में ₹25 करोड़ का लोन लिया जाएगा। यह व्यवस्था फाइनेंशियल ईयर 2026-27 और 2027-28 तक जारी रहेगी, जिससे कुल ₹100 करोड़ की रकम जुटाई जा सकेगी। इस लोन पर 12% प्रति वर्ष तक ब्याज देना होगा और इसे एक साल की अवधि में चुकाना होगा।

क्यों उठाया ये कदम?

पेपर मैन्युफैक्चरिंग के अपने मुख्य बिजनेस से हटकर रियल एस्टेट में उतरना Balkrishna Paper Mills के लिए एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। कंपनी के सामने कई वित्तीय अड़चनें हैं, जैसे कि पिछले तीन सालों से लगातार घाटा और निगेटिव नेट वर्थ। ऐसे में, रियल एस्टेट जैसे नए सेक्टर में उतरकर कंपनी नई कमाई के रास्ते खोलना चाहती है और अपनी प्रॉपर्टी का बेहतर इस्तेमाल करना चाहती है।

हालांकि, यह लोन ग्रुप की कंपनियों से लिया जा रहा है, जो कंपनी के टर्नओवर के हिसाब से 'मटेरियल रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन्स' की श्रेणी में आता है। इसलिए, इसे पूरा करने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेना जरूरी है। यह दिखाता है कि कंपनी अभी भी फाइनैंसिंग के लिए अपने ग्रुप पर काफी निर्भर है।

कंपनी की पुरानी कहानी

Balkrishna Paper Mills, Siyaram Poddar Group का हिस्सा है और 2013 से पेपर और पेपरबोर्ड के क्षेत्र में काम कर रही है। लेकिन, कंपनी को पिछले कुछ समय से भारी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी के रेवेन्यू में 32.27% की बड़ी गिरावट आई थी। पिछले बारह महीनों (TTM) में कंपनी को ₹61.17 मिलियन का नेट लॉस हुआ है।

नए कदम का असर

  • कंपनी अब आधिकारिक तौर पर रियल एस्टेट डेवलपमेंट सेक्टर में आ जाएगी, जो इसके मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MoA) के तहत भी आता है।
  • इस कदम से कंपनी के लिए ग्रोथ का नया रास्ता खुलने और प्रॉपर्टी का बेहतर इस्तेमाल होने की उम्मीद है।
  • ₹100 करोड़ के लोन के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मिलना अब कंपनी के लिए बहुत अहम है।
  • रियल एस्टेट में कितना निवेश होगा, यह प्रोजेक्ट की संभावनाओं और मार्केट की स्थिति पर निर्भर करेगा।

खतरे भी कम नहीं

  • कंपनी को पिछले तीन सालों से लगातार हो रहा नुकसान और निगेटिव नेट वर्थ सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
  • ग्रुप की कंपनियों से लिया जाने वाला यह लोन एक बड़ी डील है, जिसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी की जरूरत होगी। यह दर्शाता है कि कंपनी के लिए फंडिंग का सोर्स ग्रुप ही बना हुआ है।

इंडस्ट्री में बाकी कंपनियां क्या कर रही हैं?

Balkrishna Paper Mills जहां पेपर मैन्युफैक्चरिंग में थी, वहीं रियल एस्टेट में उसका कदम इंडस्ट्री के सीधे मुकाबले वाली कंपनियों जैसे JK Paper Ltd. और West Coast Paper Mills Ltd. से अलग है, जो सिर्फ पेपर प्रोडक्ट्स पर फोकस करती हैं। कुछ पुरानी कंपनियों जैसे Aditya Birla Real Estate (पहले Century Textiles) ने पेपर और रियल एस्टेट दोनों में काम किया था, लेकिन बाद में उन्होंने पेपर बिजनेस बेचकर प्रॉपर्टी डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित किया।

कैसा रहा है कंपनी का फाइनेंशियल परफॉरमेंस?

  • 31 मार्च 2025 को खत्म हुई तिमाही में कंपनी ने ₹2.13 मिलियन का नेट लॉस दर्ज किया।
  • 02 अप्रैल 2026 तक पिछले बारह महीनों (TTM) में कंपनी का नेट प्रॉफिट -₹61.17 मिलियन रहा।
  • पिछले बारह महीनों (TTM) में कंपनी की बुक वैल्यू प्रति शेयर ₹-53.90 निगेटिव थी।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

  • शेयरधारकों की मीटिंग में इंटर कॉर्पोरेट डिपॉजिट्स को मंजूरी मिलती है या नहीं।
  • रियल एस्टेट डेवलपमेंट डिवीजन के लिए कंपनी की फिजिबिलिटी स्टडी और शुरुआती निवेश की क्या योजनाएं हैं।
  • रियल एस्टेट में उतरने के साथ-साथ कंपनी अपने कोर पेपर बिजनेस के प्रदर्शन को कैसे सुधारती है।
  • ICDs के लिए क्या शर्तें होंगी और उनका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा।
  • कंपनी की वित्तीय स्थिति को सुधारने की समग्र रणनीति और इन नई पहलों पर अपडेट।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.