GST का ₹1 करोड़ का झटका!
Bajaj Electricals Limited ने हाल ही में बताया है कि उसे गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) का एक असेसमेंट ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर मुंबई स्थित ऑफिस ऑफ द असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ CGST & Central Excise द्वारा जारी किया गया है।
ऑर्डर में क्या है?
इस असेसमेंट में कुल ₹67.31 लाख (यानी ₹0.67 करोड़) की ग्रॉस डिमांड और ₹33.65 लाख (यानी ₹0.34 करोड़) का अतिरिक्त पेनाल्टी शामिल है। इस तरह, कंपनी पर कुल मिलाकर ₹1.01 करोड़ का बकाया निकाला गया है।
डिमांड की वजह?
कंपनी का कहना है कि यह GST डिमांड और पेनाल्टी इसलिए लगी है क्योंकि उसके वेंडरों ने अपने GSTR 3B रिटर्न्स को समय पर फाइल नहीं किया था। यह कंपनी की सप्लाई चेन में एक कंप्लायंस (compliance) से जुड़ी समस्या की ओर इशारा करता है।
कंपनी का पक्ष और असर
Bajaj Electricals ने साफ तौर पर कहा है कि इस असेसमेंट ऑर्डर का उसके मौजूदा ऑपरेशन्स (operations), फाइनेंस (finance) या किसी अन्य बिजनेस एक्टिविटीज पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। कंपनी फिलहाल अपने कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है, जिसमें अपील फाइल करने की संभावना भी शामिल है।
पिछला रिकॉर्ड क्या कहता है?
वैसे, Bajaj Electricals का GST डिमांड्स और टैक्स लिटिगेशन (litigation) से पुराना नाता रहा है।
- फरवरी 2025 में, कंपनी ने पंजाब से ₹14.08 करोड़ की GST डिमांड का खुलासा किया था।
- इसके अलावा, मार्च 2026 में, तमिलनाडु से ₹19.93 करोड़ के दो GST असेसमेंट ऑर्डर प्राप्त हुए थे।
- एक और मामले में, मार्च 2026 में ही, एक अपील में GST डिमांड को ₹11.51 लाख से घटाकर ₹4.60 लाख कर दिया गया था, हालांकि एक अलग ₹3.62 करोड़ की डिमांड के खिलाफ अपील खारिज हो गई थी।
- सितंबर 2025 में, कंपनी ने एक एमनेस्टी स्कीम (Amnesty Scheme) का उपयोग करके ITC (Input Tax Credit) डिसअलाउंसेज (disallowances) से जुड़ा GST डिस्प्यूट (dispute) सुलझाया था, जिसमें ब्याज और पेनाल्टी माफ कर दी गई थी।
आगे क्या?
Bajaj Electricals का मैनेजमेंट कानूनी समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। शेयरहोल्डर्स (shareholders) कंपनी की रणनीति को लेकर और अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
संभावित जोखिम
अगर Bajaj Electricals की अपील प्रक्रिया सफल नहीं होती है, तो कंपनी को ₹1.01 करोड़ का पूरा अमाउंट चुकाना पड़ सकता है। इसके अलावा, भविष्य में वेंडरों की कंप्लायंस में गड़बड़ी जैसी घटनाएं इसी तरह की टैक्स डिमांड्स को जन्म दे सकती हैं।
