FY26 में प्रदर्शन: नुकसान में बड़ा इजाफा
BKM Industries ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (FY26) के नतीजे जारी किए हैं। इस दौरान कंपनी की कुल आमदनी (Revenue) ₹69.04 लाख रही। वहीं, कंपनी का नेट लॉस (Net Loss) पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) के ₹5.57 करोड़ की तुलना में FY26 में दोगुना से ज्यादा बढ़कर ₹13.08 करोड़ हो गया। मार्च तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी की आमदनी में पिछले साल के मुकाबले 69.90% की भारी गिरावट देखी गई और यह सिर्फ ₹67.49 लाख रही।
रीस्ट्रक्चरिंग से बदली नेट वर्थ की तस्वीर
नुकसान में बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी की बैलेंस शीट में एक अहम सकारात्मक बदलाव आया है। FY26 में कंपनी की नेट वर्थ (Net Worth) ₹27.18 करोड़ दर्ज की गई, जबकि FY25 में यह ₹1.73 करोड़ निगेटिव थी। इस सुधार की मुख्य वजह Silvassa और Bankura में मौजूद एसेट्स का रीवैल्यूएशन (Asset Revaluation) और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मंजूरी से हुई रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) के तहत जारी किए गए नए इक्विटी शेयर (New Equity) हैं।
ऑपरेशनल दबाव और NCLT का दखल
हालांकि, कंपनी के कोर ऑपरेशन्स (Core Operations) अभी भी गंभीर दबाव में हैं। कंपनी का सालाना खर्च ₹4.86 करोड़ रहा, जो कि उसकी आमदनी ₹0.69 करोड़ से काफी अधिक है। फिलहाल, BKM Industries नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के तहत कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। प्रमोटर्स (Promoters) ने NCLT-अनुमोदित रेजोल्यूशन प्लान के तहत नए इक्विटी शेयर जारी कर ताजा पूंजी (Fresh Capital) डाली है।
मुख्य चिंताएं और आगे की राह
शेयरहोल्डर्स (Shareholders) के लिए नेट वर्थ का निगेटिव से पॉजिटिव होना एक राहत की बात है। लेकिन, कंपनी पर कर्ज (Debt) भी बढ़कर ₹18.46 करोड़ हो गया है। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी नए इक्विटी शेयरों के जारी होने से मजबूत हुई है। सबसे बड़ी चिंता कंपनी का कमजोर ऑपरेशनल परफॉरमेंस (Operational Performance) बनी हुई है, जहां खर्च आमदनी से कहीं ज्यादा है। इसके अलावा, कंपनी की एक सब्सिडियरी (Subsidiary) की वायबिलिटी (Viability) पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि 31 मार्च, 2026 तक उसके पास कोई रियलाइजेबल वैल्यू वाला एसेट नहीं था। बढ़ता कर्ज भी वित्तीय बोझ को बढ़ा रहा है।
आगे चलकर, BKM Industries के लिए NCLT-अनुमोदित रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को सफलतापूर्वक पूरा करना सबसे अहम होगा। निवेशक कंपनी के ऑपरेशन्स में सुधार और आमदनी में बढ़ोतरी के संकेतों पर बारीकी से नजर रखेंगे। मैनेजमेंट को उच्च ऑपरेशनल लागत, सब्सिडियरी की समस्याओं और बढ़ते कर्ज के बोझ से निपटना होगा।