BHEL ने टेंडर नियमों पर क्या कहा?
सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दिए एक जवाब में विस्तार से बताया है कि जमीन से सटे देशों से खरीद को लेकर सरकार के नियमों में बदलाव की खबरों पर कंपनी का क्या रुख है।
पॉलिसी में सीधी भागीदारी से इनकार
BHEL ने स्पष्ट किया है कि भारत की जमीन से सटे देशों से 21 खास वस्तुओं की खरीद के लिए जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) के रूल 144(xi) के तहत 5-वर्षीय रिलैक्सेशन (छूट) को मंजूरी मिली है। हालांकि, कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि इस पॉलिसी में हुए बदलाव को लेकर उनकी कोई सीधी बातचीत या मोलभाव (negotiation) नहीं हुआ है। यह सरकारी निर्देश का पालन है।
शेयर में हलचल और कंपनी का जवाब
इसके अलावा, BHEL ने एक्सचेंज को यह भी सूचित किया कि वे किसी भी ऐसी अनौपचारिक या अप्रकाशित जानकारी से अनभिज्ञ हैं, जो हाल ही में उनके शेयर की ट्रेडिंग गतिविधियों में हो रही हलचल के पीछे का कारण हो सकती है। इसका मतलब है कि कंपनी के पास स्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव को समझाने के लिए फिलहाल कोई नई, बाजार-प्रभावित करने वाली खबर नहीं है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
यह स्पष्टीकरण निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बाजार में चल रही अटकलों पर विराम लगाता है। BHEL ने साफ कर दिया है कि वे सीधे तौर पर सरकारी नीतियों को तय या मोलभाव नहीं करते, बल्कि सरकारी नियमों का पालन करते हैं। यह विकास कंपनी के व्यावसायिक प्रभाव या रणनीतिक दिशा के बारे में गलतफहमी को रोकने में मदद करता है।