चेन्नई में Awfis की धाक
Awfis Space Solutions Ltd. ने 7 मई, 2026 को चेन्नई में दो नए प्रीमियम वर्कस्पेस सेंटर्स लॉन्च किए हैं। इस विस्तार के साथ, कंपनी ने दक्षिण भारतीय शहर में अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। इन नए सेंटर्स से लगभग 114,000 वर्ग फुट लीजेबल स्पेस (Leasable Space) उपलब्ध होगा। इसके बाद, चेन्नई में Awfis के कुल सेंटर्स की संख्या बढ़कर 28 हो गई है, जो करीब 875,000 वर्ग फुट में फैले हुए हैं।
क्यों हो रहा है ये विस्तार?
कंपनी का यह कदम एंटरप्राइजेज (Enterprises) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) से फ्लेक्सिबल और मैनेज्ड ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उठाया गया है। नए सेंटर्स Olympia Crystal Centre में 56,360 वर्ग फुट और DLF Cyber City Centre में 57,802 वर्ग फुट जगह में फैला हुआ है।
Awfis ने भारत भर में आक्रामक विस्तार रणनीति अपनाई है। कंपनी एसेट-लाइट मैनेज्ड एग्रीगेशन (MA) मॉडल का उपयोग करती है, जिसमें स्पेस ओनर्स के साथ पार्टनरशिप करके तेजी से विस्तार किया जाता है और कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को कम रखा जाता है। अक्टूबर 2020 में चेन्नई में एंट्री करने के बाद से, कंपनी ने स्टार्टअप्स, एसएमई (SMEs) और खासकर बड़ी कंपनियों व GCCs से मिल रही मांग के दम पर अपने नेटवर्क को लगातार बढ़ाया है। Awfis ने तीसरी तिमाही FY26 में ₹382 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू (Operating Revenue) दर्ज किया था, जो कंपनी की ग्रोथ को दर्शाता है।
इस विस्तार का मकसद चेन्नई में Awfis की मार्केट लीडरशिप (Market Leadership) को और मजबूत करना और प्रीमियम, फ्लेक्सिबल ऑफिस एनवायरनमेंट्स (Flexible Office Environments) चाहने वाले बड़े कॉर्पोरेट क्लाइंट्स और GCCs को आकर्षित करना है। ये सेंटर्स हाई-क्वालिटी कमर्शियल बिल्डिंग्स में रणनीतिक रूप से स्थित हैं, जो बेहतर एक्सेसिबिलिटी और सुविधाएं प्रदान करते हैं।
Awfis का भारतीय फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस मार्केट में Smartworks, 91Springboard और IndiQube जैसे प्लेयर्स के साथ कड़ा मुकाबला है। सेक्टर काफी कंसॉलिडेटेड (Consolidated) है, जहां लीडिंग ऑपरेटर्स नेटवर्क विस्तार और एंटरप्राइज क्लाइंट्स को हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। चेन्नई मार्केट में भी काफी ग्रोथ देखी गई है, फ्लेक्सिबल ऑफिस स्टॉक में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) मांग के एक प्रमुख स्रोत हैं, जिन्होंने 2025 में 51% मांग में योगदान दिया।
