कहां से आया इतना मुनाफा?
कंपनी के अनुसार, FY26 में उनका कुल रेवेन्यू 25.26% बढ़कर ₹830.05 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹17.79 करोड़ से बढ़कर ₹38.50 करोड़ हो गया। मुनाफे में इस भारी बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण ऑटोललाइन इंडस्ट्रियल पार्क लिमिटेड (AIPL) में कंपनी की हिस्सेदारी की बिक्री को माना जा रहा है, जिससे एक बार के लिए बड़ा फायदा हुआ है। कंपनी के चौथे तिमाही (Q4) के नतीजे भी मजबूत रहे, जिसमें रेवेन्यू 48.82% बढ़कर ₹292.20 करोड़ दर्ज किया गया।
ऑडिटर की चिंताएं: क्या दांव पर है?
यह सब आंकड़ों के बावजूद, कंपनी के ऑडिटर ने अपनी रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। ऑडिटर का कहना है कि ₹5.97 करोड़ के मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) क्रेडिट के इस्तेमाल की संभावना कम है। इस पर ऑडिटर की चिंता यह है कि अगर ये क्रेडिट इस्तेमाल नहीं हो पाते, तो कंपनी द्वारा दिखाया गया मुनाफा और नेट वर्थ (Net Worth) उम्मीद से ज्यादा हो सकता है।
कानूनी पचड़े और बढ़ता कर्ज
इसके अलावा, कंपनी एक ₹9.70 करोड़ की कंटीजेंट लायबिलिटी (Contingent Liability) का सामना कर रही है, जो यूएस कोर्ट के एक फैसले से जुड़ा है, जिसमें कंपनी को USD 10.38 Lakhs का भुगतान करना पड़ सकता है। वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड उधार (Consolidated Borrowings) भी ₹30.05 करोड़ बढ़कर ₹316.33 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल ₹286.28 करोड़ था।
भविष्य की राह
जहां कंपटीटर्स जैसे Motherson Sumi Systems Ltd और Varroc Engineering Ltd ऑर्गेनिक ग्रोथ पर फोकस कर रहे हैं, वहीं Autoline का मुनाफा एक बार की संपत्ति बिक्री से प्रभावित हुआ है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि मैनेजमेंट ऑडिटर की चिंताओं, खासकर MAT क्रेडिट को लेकर, पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यूएस कोर्ट के फैसले और बढ़ते कर्ज को लेकर कंपनी की रणनीति भी अहम होगी।