Asian Warehousing Limited के बोर्ड ने कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, मिस्टर Bhavik Bhimjyani से ₹15 करोड़ तक का अनसिक्योर्ड लोन (unsecured loan) लेने की मंजूरी दे दी है। यह लोन फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनी के सामान्य कॉर्पोरेट कामों, प्रशासनिक खर्चों और रोजमर्रा के परिचालन (operational expenses) को पूरा करना है। कंपनी के अनुसार, यह फंड कई किश्तों में लिया जाएगा और इस पर सालाना ब्याज (annual interest) देना होगा।
यह कोई नया कदम नहीं है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY 2025-26) के लिए भी कंपनी ने मिस्टर Bhavik Bhimjyani से ₹10 करोड़ तक का लोन लिया था, जिस पर 7% सालाना ब्याज दर थी और जिसे शेयर होल्डर्स ने मंजूरी दी थी।
शेयर होल्डर्स के लिए रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन (Related Party Transactions - RPTs) हमेशा ध्यान देने वाली बात होती है, क्योंकि इसमें हितों के टकराव (conflicts of interest) का खतरा रहता है। चेयरमैन से सीधा लोन लेना यह दिखाता है कि कंपनी अपनी परिचालन जरूरतों के लिए अंदरूनी वित्तपोषण (internal financing) पर निर्भर है। इस लोन को पारदर्शी तरीके से पास कराने के लिए शेयर होल्डर्स की मंजूरी बेहद जरूरी है, जो कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) के मानकों को बनाए रखने में मदद करेगी।
Asian Warehousing, जो 2012 में स्थापित हुई थी, मुख्य रूप से एग्री-प्रोडक्ट्स की वेयरहाउसिंग (warehousing) और ट्रेडिंग का काम करती है। यह कंपनी 2023 में RT Exports Limited से डीमर्ज (demerged) हुई थी।
कंपनी की वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले तीन सालों में इसके प्रॉफिट ग्रोथ में -31.33% की गिरावट देखी गई है, हालांकि रेवेन्यू ग्रोथ 9.58% रही है। कंपनी का इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (interest coverage ratio) काफी कम 0.74 है और डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity ratio) लगभग 2.2 है, जो चिंता का विषय हो सकता है। मिस्टर Bhavik Bhimjyani की कंपनी में हिस्सेदारी अब सिर्फ 0.15% है, जो हाल ही में हुए शेयरों के इंटर-से ट्रांसफर के बाद घटी है।
अब कंपनी शेयर होल्डर्स से पोस्टल बैलेट के जरिए वोटिंग कराएगी। अगर उन्हें यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान अपनी जरूरत के हिसाब से फंड निकाल सकेगी। यह एक अनसिक्योर्ड लोन है, जिसका मतलब है कि डिफॉल्ट की स्थिति में इसे सिक्योर डेट के बाद रखा जाएगा। शेयर होल्डर्स की मंजूरी मिलना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। कंपनी के पिछले वित्तीय प्रदर्शन, कम प्रॉफिट ग्रोथ और कम इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो को लेकर निवेशकों की चिंताएं बनी हुई हैं।
