मिर्जापुर स्थित यह ग्रीनफील्ड प्लांट सालाना 30,000 टन की उत्पादन क्षमता के साथ अब चालू हो गया है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी ने लगभग ₹120 करोड़ (INR 1,200 million) का निवेश किया है। हालांकि, प्लांट के चालू होने में कुछ देरी हुई; इसे मूल रूप से FY25 की चौथी तिमाही तक शुरू करने की योजना थी, लेकिन ऑपरेशनल तैयारियों के चलते अब यह 14 अप्रैल 2026 से पूरी तरह तैयार है। इस नई फैसिलिटी से Apollo Pipes की कुल उत्पादन क्षमता में सीधे 30,000 MT/annum का इजाफा होगा।
यह विस्तार Apollo Pipes की ग्रोथ स्ट्रैटेजी का एक अहम कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में, खासकर उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाना और उत्पादन को मजबूत करना है। कंपनी अगले दो सालों में अपनी कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी को बढ़ाकर 2,86,000 टन करने का लक्ष्य रखती है, और इसे पूरी तरह से बिना किसी कर्ज (Debt-free) के फंड किया जाएगा। हाल के वर्षों में, कंपनी ने Kisan Mouldings Limited जैसे अधिग्रहणों के जरिए भी अपनी उपस्थिति बढ़ाई है, जिससे पश्चिमी भारत में उसकी पकड़ मजबूत हुई है। यह नया प्लांट UPVC डोर्स और विंडोज जैसे नए सेगमेंट्स में डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) के प्रयासों को भी सपोर्ट करेगा।
Apollo Pipes एक ऐसे प्रतिस्पर्धी भारतीय प्लास्टिक पाइप्स मार्केट में ऑपरेट करती है जहाँ Supreme Industries Ltd. और Astral Ltd. जैसे बड़े प्लेयर्स भी मौजूद हैं, जिनकी मार्केट कैपिटलाइजेशन Apollo Pipes से कहीं ज्यादा है। बावजूद इसके, भारतीय प्लास्टिक पाइप्स मार्केट में मजबूत ग्रोथ का अनुमान है और यह 2031 तक USD 16.54 बिलियन तक पहुँच सकता है, जिसमें 14.18% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। यह मजबूत मार्केट ग्रोथ सभी कंपनियों के लिए बड़ी ऑपर्च्युनिटीज पेश करती है।
हालांकि प्लांट अब चालू हो गया है, लेकिन इसके चालू होने में हुई देरी यह संकेत देती है कि भविष्य में प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन (Project Execution) में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं। कंपनी का भविष्य प्रदर्शन नई क्षमता का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगा। निवेशक प्लांट के कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization), सेल्स वॉल्यूम ग्रोथ, मार्केट शेयर ट्रेंड्स और कुल प्रॉफिटेबिलिटी पर कड़ी नजर रखेंगे। 2,86,000 टन की कुल कैपेसिटी के लक्ष्य की ओर बढ़त भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा जिस पर ध्यान दिया जाएगा। एक पिछले नियामक मुद्दे (Regulatory Issue) में, कंपनी पर माल की कथित गुप्त निकासी (clandestine removal) से संबंधित ड्यूटी, ब्याज और जुर्माने की मांग की गई थी।
