प्लांट की देरी का असर
यह मिर्जापुर प्लांट, जिसकी सालाना क्षमता 30,000 टन है, कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है। इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट में शुरू में ₹1,200 मिलियन (यानी ₹120 करोड़) का इनवेस्टमेंट किया गया था। प्लांट के शुरू होने में देरी से कंपनी की कैपेसिटी एक्सपेंशन और नए यूनिट से रेवेन्यू जनरेशन की टाइमलाइन पर असर पड़ेगा।
क्या हैं बाकी एक्सपेंशन प्लान?
Apollo Pipes पहले से ही एक्सपेंशन पर जोर दे रही है। कंपनी ने हाल ही में अपने चेन्नई यूनिट की कैपेसिटी बढ़ाने के लिए ₹280 करोड़ का इनवेस्टमेंट किया था। इसके अलावा, Kisan Mouldings Limited में मेजॉरिटी स्टेक एक्वायर करके कंपनी ने वेस्टर्न इंडिया में अपनी मौजूदगी और कैपेसिटी को काफी मजबूत किया है।
इंडस्ट्री का क्या है हाल?
भारतीय प्लास्टिक पाइप्स मार्केट काफी बड़ा और कॉम्पीटिटिव है। साल 2025 में यह मार्केट लगभग USD 7.40 बिलियन का था और 2031 तक इसके USD 16.54 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी CAGR 14.18% रहने की उम्मीद है। इस तेजी वाले सेक्टर में Supreme Industries, Astral Limited, और Prince Pipes & Fittings जैसे बड़े खिलाड़ी भी अपने ऑपरेशन्स बढ़ा रहे हैं।
निवेशकों की नजर
निवेशक अब मिर्जापुर प्लांट की ऑपरेशनल रेडीनेस और प्रोडक्शन शुरू होने की नई तारीख पर बारीकी से नजर रखेंगे। साथ ही, कंपनी मैनेजमेंट से देरी के कारणों और इसे रोकने के उपायों पर कमेंट्री का भी इंतजार रहेगा।