ठाणे, महाराष्ट्र के तेहसीलदार ने MML5 प्रोजेक्ट के लिए अर्थ एक्सकैवेशन से जुड़ी कथित समस्याओं के मामले में Afcons Infrastructure लिमिटेड पर ₹1.84 करोड़ का पेनल्टी ऑर्डर जारी किया है।
कंपनी इस आदेश को अदालत में चुनौती देने की योजना बना रही है। Afcons ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पेनल्टी का कंपनी की वित्तीय स्थिति पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह मामला महाराष्ट्र में अर्थ एक्सकैवेशन को लेकर Afcons के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई के पैटर्न को उजागर करता है। उदाहरण के लिए, मई 2020 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने समृद्धी महामार्ग प्रोजेक्ट से जुड़े ₹244 करोड़ के पेनल्टी ऑर्डर पर रोक लगा दी थी। इससे पहले भी इसी तरह के संदर्भ में ₹239 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था।
हाल ही में, मार्च 2024 में, उसी अदालत ने सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए अर्थ एक्सकैवेशन पर ठाणे तेहसीलदार द्वारा लगाए गए ₹1.47 करोड़ के पेनल्टी ऑर्डर को पलट दिया था। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि सार्वजनिक कार्यों के लिए की गई खुदाई, जिसे बाद में फिर से भरा गया हो, आम तौर पर रॉयल्टी शुल्क के दायरे में नहीं आती, जब तक कि उसका कोई व्यावसायिक उपयोग न हो।
अपनी वित्तीय ताकत की बात करें तो, Afcons का फाइनेंशियल ईयर 2024 का रेवेन्यू ₹13,647 करोड़ रहा, जबकि मुनाफा ₹450 करोड़ दर्ज किया गया। यह मजबूत वित्तीय स्थिति कंपनी को ऐसे मामलों से निपटने में सक्षम बनाती है।
अब सबकी निगाहें Afcons द्वारा अपील दायर करने की प्रक्रिया और उसके बाद अदालती फैसलों पर टिकी रहेंगी। निवेशक और विश्लेषक कंपनी के खुदाई नियमों के अनुपालन पर भी नजर रखेंगे, खासकर इस इतिहास को देखते हुए।
