NCLT के 1 अप्रैल 2026 के आदेश ने विलय प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है, जो दिसंबर 2025 में मिली शुरुआती मंजूरी के बाद हुआ।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य APSEZ के कॉर्पोरेट ढांचे को सरल बनाना है, जिसमें सब्सिडियरी को सीधे पैरेंट कंपनी के अधीन लाया जाएगा। यह कंसॉलिडेशन (Consolidation) पोर्ट-संबंधित एसेट्स (Assets) और ऑपरेशंस को एक ही, अधिक कुशल इकाई में एकीकृत करेगा, जिससे APSEZ के विशाल पोर्ट नेटवर्क में बेहतर तालमेल (Synergy) को बढ़ावा मिलेगा।
Adani Harbour Services Limited अब एक अलग कानूनी इकाई के रूप में काम नहीं करेगी। इसके सभी एसेट्स, देनदारियां (Liabilities) और ऑपरेशंस Adani Ports and Special Economic Zone Limited में स्थानांतरित हो जाएंगे। यह आंतरिक पुनर्गठन (Restructuring) एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों को कम करने और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग को सुचारू बनाने में मदद करेगा, जो APSEZ की एकीकृत और कुशल परिचालन मॉडल की रणनीति का हिस्सा है।
कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹3,02,000 करोड़ है। FY25 के लिए Adani Ports and SEZ का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) ₹31,079 करोड़ दर्ज किया गया था। कंपनी पूरे भारत में 15 पोर्ट्स और टर्मिनल्स का प्रबंधन करती है।
हालांकि NCLT की मंजूरी एक महत्वपूर्ण कदम है, मर्जर के कार्यान्वयन (Execution) के दौरान एकीकरण (Integration) की संभावित चुनौतियाँ अल्पकालिक परिचालन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। APSEZ को JNPT (भारत का सबसे बड़ा पब्लिक पोर्ट) और DP World जैसे ग्लोबल ऑपरेटर्स से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। यह कंसॉलिडेशन परिचालन पैमाने (Operational Scale) और दक्षता को बढ़ाकर APSEZ की प्रतिस्पर्धी स्थिति को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है।
