क्या है पूरा मामला?
गुजरात के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ स्टेट टैक्स ने Zydus Lifesciences को एक ऑर्डर जारी किया है। यह ऑर्डर फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के लिए है और इसमें ₹3.28 करोड़ की टैक्स डिमांड की गई है। आरोप है कि कंपनी ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत फायदा उठाया है। इस कुल रकम में मूल डिमांड, साथ ही इंटरेस्ट और पेनाल्टी भी शामिल है।
कंपनी का रुख: अपील और आत्मविश्वास
Zydus Lifesciences ने 24 मार्च, 2026 को एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि कंपनी इस फैसले के खिलाफ अपील करने का इरादा रखती है। कंपनी का भरोसा है कि उनके पास अपील के लिए मजबूत आधार हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह मामला उनके पक्ष में जाएगा। मैनेजमेंट का यह भी कहना है कि इस डिमांड का कंपनी के वित्तीय सेहत पर कोई खास या बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
टैक्स विवादों का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब Zydus Lifesciences को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) या CENVAT क्रेडिट से जुड़े मामलों में इस तरह के नोटिस मिले हों।
- इससे पहले, दिसंबर 2025 में, कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के लिए ₹2.8 करोड़ की जीएसटी डिमांड का सामना करना पड़ा था, जिसमें भी इनपुट टैक्स क्रेडिट के गलत उपयोग का आरोप था।
- सितंबर 2025 में, विदेशी कंपनियों को दिए गए सेल्स कमीशन पर CENVAT क्रेडिट से संबंधित ₹3.35 करोड़ की डिमांड कन्फर्म हुई थी, जिसे Zydus ने चुनौती दी थी।
- जनवरी 2025 में, जुलाई 2017 से मार्च 2021 तक की अवधि के लिए जीएसटी ऑडिट के बाद ₹10.12 मिलियन (लगभग ₹1.01 करोड़) का पेनाल्टी लगाया गया था, जिसे भी कंपनी ने चुनौती देने का मन बनाया था।
आगे क्या होगा?
Zydus Lifesciences अब नए टैक्स डिमांड ऑर्डर के खिलाफ औपचारिक रूप से अपील की प्रक्रिया शुरू करेगी। कंपनी का मैनेजमेंट अपील अथॉरिटीज के सामने अपना पक्ष मजबूत रखने पर ध्यान देगा। तब तक, कंपनी की वित्तीय प्लानिंग में इस संभावित देनदारी को ध्यान में रखा जाएगा।
इंडस्ट्री में टैक्स विवाद आम
फार्मा सेक्टर में टैक्स विवाद कोई नई बात नहीं है। Zydus Lifesciences जैसी अन्य कंपनियों को भी ऐसे ही मुद्दों का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, Divi's Laboratories को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े मामले में ₹570.51 करोड़ की भारी टैक्स डिमांड का सामना करना पड़ा था। इसी तरह, Sanofi India को 2026 की शुरुआत में इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम के संबंध में ₹2.37 करोड़ का टैक्स नोटिस मिला था। ये मामले दर्शाते हैं कि भारतीय फार्मा इंडस्ट्री में ITC और ट्रांसफर प्राइसिंग जैसे मुद्दों पर टैक्स लिटिगेशन काफी आम है।
