NCLT, बेंगलुरु बेंच के आदेश के बाद Vivimed Labs Limited अब आधिकारिक तौर पर इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स (Insolvency Proceedings) में आ गई है। यह आदेश 15 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। कंपनी पर जर्मन क्रेडिटर Blue Cube Germany Assets GmbH & Co. KG का ₹2.78 करोड़ से ज़्यादा का ऑपरेशनल कर्ज बकाया था, जो 2012 से 2014 के बीच सप्लाई किए गए परक्लोरोएथिलीन (perchloroethylene) के लिए था। इसी के चलते क्रेडिटर ने इंसॉल्वेंसी के लिए याचिका दायर की थी।
इंसॉल्वेंसी मैनेजमेंट और डेडलाइन
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP), टी. नारायण स्वामी (T Narayana Swamy) को नियुक्त किया गया है। सभी क्रेडिटर्स (Creditors) को 1 मई, 2026 तक अपने दावों (claims) के सबूत जमा कराने होंगे। इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (Insolvency Resolution Process) के 11 अक्टूबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
वित्तीय संकट की पृष्ठभूमि
Vivimed Labs पिछले कुछ समय से गंभीर वित्तीय संकटों से जूझ रही थी। कंपनी पर लोन चुकाने में डिफॉल्ट (Default) के कारण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने इसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया था। मार्च 2022 में SBI ने फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) भी शुरू किया था। बाद में, अक्टूबर 2025 के आसपास, कंपनी की वित्तीय संपत्तियों को SBI से रेयर एसेट रिकंस्ट्रक्शन लिमिटेड (Rare Asset Reconstruction Ltd. - Rare ARC) ने अधिग्रहित कर लिया था। इतना ही नहीं, SBI की शिकायत पर कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की जांच भी चल रही थी, जिसे SBI ने 'फ्रॉड' (Fraud) करार दिया था।
कर्ज का पैमाना और पिछली फाइलिंग
NCLT के इस आदेश से पहले, Vivimed Labs ने फरवरी 2026 में प्री-पैक इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (PPIRP) के लिए भी आवेदन किया था। उस समय कंपनी पर 31 जनवरी, 2026 तक ₹512.53 करोड़ का डिफॉल्ट बकाया था। NCLT ने यह भी माना कि कंपनी के खिलाफ कई अन्य इंसॉल्वेंसी याचिकाएं पहले से ही पेंडिंग हैं।
कानूनी दांव-पेंच और असर
अब कंपनी का भविष्य इंसॉल्वेंसी कानून के तहत रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) पर निर्भर करेगा। एक लीगल मोरेटोरियम (Legal Moratorium) लागू हो गया है, जिसका मतलब है कि Vivimed Labs के खिलाफ किसी भी तरह के मुकदमे या संपत्ति ट्रांसफर पर रोक लगा दी गई है। IRP कंपनी के संचालन का प्रबंधन करेगा, और क्रेडिटर्स एक कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) बनाएंगे जो कंपनी की स्थिति का मूल्यांकन करेगी और एक रेजोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) पर फैसला लेगी।
शेयरधारकों पर असर और जोखिम
शेयरधारकों (Shareholders) के लिए यह खबर चिंताजनक है, क्योंकि उन्हें अपने निवेश के महत्वपूर्ण रूप से कम होने या पूरी तरह से डूब जाने का बड़ा जोखिम है। क्रेडिटर्स को रिकवरी में प्राथमिकता दी जाती है। कंपनी का भविष्य एक सहमत रेजोल्यूशन प्लान पर निर्भर करता है; अगर ऐसा नहीं हो पाता तो कंपनी लिक्विडेशन (Liquidation) की ओर जा सकती है, जिससे सभी हितधारकों (stakeholders) को भारी नुकसान होगा। चल रही CBI जांच इस प्रक्रिया में और जटिलताएं और जोखिम पैदा करती है।
इंडस्ट्री का संदर्भ
Vivimed Labs फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals) और स्पेशियलिटी केमिकल्स (Specialty Chemicals) सेक्टर में काम करती है। हालांकि, डायरेक्ट पीयर कंपेरिजन (Peer Comparison) करना मुश्किल है, क्योंकि Vivimed Labs इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स के एक बहुत एडवांस्ड स्टेज (Advanced Stage) पर है।
अहम तारीखें और आगे के कदम
कुछ महत्वपूर्ण तारीखें जिन पर निवेशकों को नज़र रखनी चाहिए, उनमें 1 मई, 2026 (क्रेडिटर क्लेम डेडलाइन) और 11 अक्टूबर, 2026 (प्रोसेस क्लोजर की अनुमानित तारीख) शामिल हैं। निवेशकों के लिए क्लेम सबमिशन, कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स के फैसले और रेजोल्यूशन प्लान की प्रगति पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा। IRP की रिपोर्ट 24 जून, 2026 को होने वाली सुनवाई में समीक्षा के लिए पेश की जाएगी।
