नतीजे बताते हैं कि क्या हुआ?
Syngene International के लिए यह फाइनेंशियल ईयर मिला-जुला रहा। कंपनी ने अपने ऑपरेशन्स से होने वाली कमाई को 3% बढ़ाकर ₹3,739 करोड़ कर लिया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में ₹3,642 करोड़ था। चौथी तिमाही (Q4) में भी रेवेन्यू 2% बढ़कर ₹1,037 करोड़ दर्ज किया गया।
लेकिन, जहां एक तरफ कमाई बढ़ी, वहीं मुनाफा (Profit) घट गया। पूरे साल का PAT (एक्सेप्शनल आइटम्स को छोड़कर) 20% गिरकर ₹380 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल यह ₹475 करोड़ था। चौथी तिमाही में PAT 16% घटकर ₹153 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹183 करोड़ था।
ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन में भी बड़ी गिरावट आई है। FY26 में मार्जिन घटकर 25% हो गया, जो FY25 में 29% था। चौथी तिमाही में यह 29% पर आ गया, जो पिछले साल 34% था।
क्यों घटी मुनाफा?
कंपनी के नतीजों से साफ है कि रेवेन्यू तो बढ़ा है, लेकिन मार्जिन सिकुड़ने और ऑपरेटिंग खर्चों में बढ़ोतरी के चलते मुनाफा कम हुआ है। ऐसा लगता है कि नए प्रोजेक्ट्स और सुविधाओं में लगातार निवेश की वजह से कंपनी के खर्च बढ़े हैं।
बावजूद इसके, बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए ₹1.25 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश की है, जो शेयरहोल्डरों की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
निवेशक क्या देखेंगे?
निवेशक अब कंपनी की नई बायोलॉजिक्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के प्रदर्शन और उस पर आने वाले खर्चों पर करीब से नजर रखेंगे। कंपनी के नए एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (ADC) बिजनेस का विस्तार और पायलट प्रोजेक्ट्स का बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में बदलना भी अहम होगा। सीईओ के पद से हटने (30 जून, 2026) के बाद नेतृत्व में बदलाव का असर भी देखा जाएगा।
Syngene International, Kiran Mazumdar-Shaw द्वारा स्थापित, फार्मा, बायोटेक, न्यूट्रिशन जैसे सेक्टरों में इंटीग्रेटेड साइंटिफिक सर्विसेज देने वाली एक लीडिंग CRDMO (कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन) है। यह WuXi AppTec, Charles River Laboratories और Sai Life Sciences जैसे दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।
