100% ग्रीन एनर्जी पर Bidar Campus
Sai Life Sciences ने अपने Bidar campus को पूरी तरह से रिन्यूएबल (नवीकरणीय) बिजली पर चलाने का ऐलान किया है। यह भारत का पहला CRDMO (Contract Research, Development & Manufacturing Organization) साइट है जिसने यह उपलब्धि हासिल की है। इस बड़े कदम से कंपनी सालाना अनुमानित 35,110 मीट्रिक टन CO2 उत्सर्जन को कम करेगी। यह सारा बदलाव सोलर पावर, विंड एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट्स (REC) के इस्तेमाल से संभव हुआ है।
सस्टेनेबिलिटी को मिली नई उड़ान
Bidar campus, जो API और एनिमल हेल्थ API मैन्युफैक्चरिंग का एक अहम केंद्र है, पिछले कुछ सालों में धीरे-धीरे रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ा है। जहाँ FY20 में रिन्यूएबल बिजली का इस्तेमाल सिर्फ 21% था, वहीं FY24 तक यह 89% तक पहुँच गया। अभी, लगभग 97% एनर्जी डायरेक्ट सोलर और विंड पावर से आ रही है। यह पहल कंपनी के उस बड़े लक्ष्य के अनुरूप है जहाँ वह अपने कुल बिजली उत्पादन का लगभग 80% रिन्यूएबल सोर्स से हासिल करना चाहती है।
ESG प्रोफाइल को मज़बूती
इस ग्रीन शिफ्ट से Sai Life Sciences की Environmental, Social, and Governance (ESG) प्रोफाइल मज़बूत हुई है। कॉम्पिटिटिव CRDMO सेक्टर में, ग्लोबल क्लाइंट्स को आकर्षित करने और रेगुलेटरी डिमांड्स को पूरा करने के लिए सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) का मजबूत होना बहुत ज़रूरी है। सबसे ख़ास बात यह है कि Bidar campus अब खरीदे गए बिजली से होने वाले मार्केट-बेस्ड एमिशन (बाज़ार-आधारित उत्सर्जन) को शून्य कर चुका है।
इंडस्ट्री में कहां हैं दूसरे?
भारत की दूसरी बड़ी CRDMO कंपनियाँ भी सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान दे रही हैं। Syngene International भी ग्रीन एनर्जी में निवेश कर रहा है, Laurus Labs अपने मैन्युफैक्चरिंग साइट्स पर सोलर पावर अपना रहा है, और Divi's Laboratories भी एनर्जी एफिशिएंसी बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है।
आगे का रास्ता
Sai Life Sciences Bidar campus में FY26 तक 100% रिन्यूएबल पावर कन्वर्जन के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम जारी रखेगा।
