NCLT का बड़ा फैसला: DBS Bank का किराया दावा खारिज
चेन्नई बेंच के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 2 अप्रैल, 2026 को DBS Bank (पूर्व में लक्ष्मी विलास बैंक) द्वारा कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दौरान किराए के भुगतान को लेकर दायर एक अर्ज़ी को खारिज कर दिया है। यह आदेश 10 अप्रैल, 2026 को सार्वजनिक किया गया, जिसमें यह साफ कर दिया गया है कि इस फैसले का Orchid Pharma पर कोई भी वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह फैसला Orchid Pharma के CIRP से जुड़ा है, जो अगस्त 2017 में शुरू हुआ था। कंपनी पर लगभग ₹3,200-3,600 करोड़ का भारी कर्ज था, जिसने इसे पुनर्जीवित करना एक जटिल कानूनी और वित्तीय कार्य बना दिया था। कई रेज़ोल्यूशन एप्लीकेंट्स और कानूनी चुनौतियों, जिसमें NCLAT और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप भी शामिल थे, के बाद, मार्च 2020 के आसपास Dhanuka Laboratories की रेज़ोल्यूशन योजना को मंजूरी मिली और लागू किया गया। इसी दौरान, कंपनी DBS Bank के साथ किराए की एक पुरानी देनदारी को निपटाने के लिए भी बातचीत कर रही थी, जिसे पहले ही एक समझौते के तहत सुलझा लिया गया था।
क्या मायने हैं इस फैसले के?
NCLT द्वारा DBS Bank की अर्ज़ी को खारिज करने से Orchid Pharma को CIRP अवधि से जुड़ी देनदारियों को लेकर कानूनी स्पष्टता मिली है। इससे कंपनी के लिए पिछली देनदारियों को निपटाने में मदद मिलेगी और आगे के लिए विवादों की गुंजाइश कम होगी। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इससे उस पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।