मुनाफे के दावों के पीछे की कड़वी सच्चाई
Nutraplus India ने जून 2021 को समाप्त हुई तिमाही (Q1 FY22) के लिए ₹0.59 करोड़ (यानी 58.57 लाख रुपये) का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले एक बड़ी वापसी है, जब कंपनी को घाटा हुआ था। कंपनी की कुल आय यानी रेवेन्यू में भी जबरदस्त उछाल देखा गया, जो 1477% बढ़कर ₹0.61 करोड़ ( 61.17 लाख रुपये) पर पहुंच गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह सिर्फ ₹0.04 करोड़ था। तिमाही के लिए कुल खर्च सिर्फ ₹0.03 करोड़ ( 2.60 लाख रुपये) रहा, जिसने रिपोर्ट किए गए मुनाफे में योगदान दिया।
असलियत क्या है?
भले ही कंपनी के नतीजे आकर्षक दिख रहे हों, लेकिन Nutraplus India की वित्तीय और परिचालन स्थिति बेहद गंभीर है। कंपनी ने खुद माना है कि SARFEASI Act, 2002 के तहत उसके सभी प्लांट और उपकरण बिक चुके हैं। इसका मतलब है कि कंपनी की मुख्य परिचालन संपत्ति अब उसके पास नहीं है।
इसके अलावा, कंपनी FY 2019-20 से NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) बनी हुई है, जो गंभीर ऋण डिफॉल्ट का संकेत है। ऑडिटर की रिपोर्ट में कंपनी की ओर से जरूरी वित्तीय डेटा प्रदान करने में विफलता का जिक्र है, जिससे कंपनी के परिचालन की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
कंपनी की जमीन-जायदाद और कर्ज काThea
Nutraplus India का परिचालन गंभीर वित्तीय संकटों से जूझ रहा है। बैंकों के बढ़ते लोन डिफॉल्ट के कारण, कंपनी ने SARFEASI Act, 2002 के तहत नीलामी में अपनी महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग एसेट्स, जिसमें जमीन, बिल्डिंग और प्लांट व मशीनरी शामिल थे, खो दी हैं।
इन वित्तीय डिफॉल्ट्स के चलते, प्रमुख बैंकों ने FY 2019-20 के आसपास Nutraplus India के खातों को NPA घोषित कर दिया था। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब ऑडिटर अपनी रिपोर्ट में डेटा की कमी के कारण जांच का दायरा सीमित होने की बात कहते हैं। कंपनी SEBI और कंपनी अधिनियम के तहत अपने वित्तीय नतीजे समय पर जमा न करने के नियमों का पालन करने में भी विफल रही है।
अब क्या बदलेगा?
- Q1 FY22 के लिए रिपोर्ट किए गए मुनाफे को कंपनी की गंभीर परिचालन सीमाओं और वित्तीय संकट की छाया में देखा जाना चाहिए।
- शेयरधारकों को इस वास्तविकता का सामना करना होगा कि कंपनी ने अपनी सभी मुख्य उत्पादन संपत्ति खो दी है।
- NPA की स्थिति लगातार बने रहने से गंभीर ऋण समस्याओं और भविष्य में फंडिंग की कमी का संकेत मिलता है।
- ऑडिटर की रिपोर्ट कंपनी द्वारा पेश की गई वित्तीय जानकारी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
- नियमों का लगातार पालन न करना आगे चलकर नियामक कार्रवाई या जुर्माने का जोखिम बढ़ाता है।
आगे क्या देखना है?
- SEBI या स्टॉक एक्सचेंजों की ओर से कोई और नियामक कार्रवाई या जुर्माना।
- संपत्ति गंवाने के बाद परिचालन निरंतरता को संबोधित करने के लिए प्रबंधन की कोई रणनीति।
- कंपनी की NPA स्थिति और संभावित ऋण समाधान योजनाओं पर अपडेट।
- वित्तीय नतीजे जमा करने की समय-सीमा का भविष्य में अनुपालन।
- पुनर्गठन, परिसमापन, या नियंत्रण परिवर्तन की किसी भी कार्यवाही के संकेत।
