Novartis India Limited के टैक्स विवाद मामले में एक अहम डेवलपमेंट (development) हुआ है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें वह 2013-14 के असेसमेंट ईयर (Assessment Year) के लिए आए ₹10.89 करोड़ के टैक्स और इंटरेस्ट (interest) के साथ ₹6.85 करोड़ के जुर्माने को चुनौती दे रही है। कोर्ट का यह ऑर्डर 27 मार्च 2026 को आया, और 29 मार्च 2026 को कंपनी ने इसकी जानकारी दी। इस फैसले के साथ ही ₹17.74 करोड़ के इस पूरे विवाद पर अब कानूनी सुनवाई का रास्ता खुल गया है।
कंपनी मैनेजमेंट के अनुसार, यह मामला 2013-14 के असेसमेंट ईयर से जुड़ा है। Novartis India इस बड़ी टैक्स डिमांड और जुर्माने को सही नहीं मानती और इसे कोर्ट में लड़ने का फैसला किया है। कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार किए जाने का मतलब है कि कंपनी अब इस मामले में अपनी दलीलें पेश कर सकेगी। पहले भी कंपनी ने यह स्पष्ट किया था कि इस मामले से जुड़े जरूरी प्री-डिपॉजिट अमाउंट (pre-deposit amounts) का प्रोविजन (provision) उसके फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स (financial records) में कर लिया गया है, जो तत्काल वित्तीय दबाव को कम करने में मददगार है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि Novartis India का फार्मा सेक्टर में एक बड़ा नाम है, और पहले भी इसे टैक्स से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ा है। साल 2014 में, भारत के नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (National Pharmaceutical Pricing Authority) ने कंपनी पर ज़्यादा कीमत वसूलने के आरोप में करीब ₹3 अरब (लगभग $49 मिलियन) का भारी जुर्माना भी लगाया था।
अब, 2013-14 के टैक्स असेसमेंट को चुनौती देने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। आगे की कोर्ट हियरिंग्स (court hearings) और कोर्ट से आने वाले किसी भी नए फैसले पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। अगर कोर्ट का अंतिम फैसला कंपनी के खिलाफ जाता है, तो उसे ₹10.89 करोड़ (टैक्स और इंटरेस्ट) और ₹6.85 करोड़ (जुर्माना) की पूरी राशि चुकानी पड़ सकती है, और साथ ही कानूनी खर्चों में भी बढ़ोतरी होगी।
