प्रमोटर की बड़ी चाल: Novartis AG पूरी हिस्सेदारी बेचेगी
Novartis India के भविष्य को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। पैरेंट कंपनी Novartis AG ने अपनी 70.68% हिस्सेदारी बेचने का इरादा जताया है। इस कदम से भारतीय शेयरधारकों के लिए एक अनिवार्य ओपन ऑफर (Mandatory Open Offer) शुरू होगा, जो निवेशकों के लिए अगले कदम तय करेगा।
वित्तीय प्रदर्शन पर एक नज़र
जहां एक ओर पैरेंट कंपनी के फैसले ने सबका ध्यान खींचा है, वहीं कंपनी के तिमाही नतीजों में भी गिरावट दर्ज की गई है। Q4 FY26 में Novartis India का नेट प्रॉफ़िट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 13.82% गिरकर ₹25.25 करोड़ पर पहुंच गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) की बात करें तो, नेट प्रॉफ़िट 7.65% घटकर ₹93.18 करोड़ रहा, जबकि कुल रेवेन्यू ₹393.10 करोड़ रहा। हालांकि, कंपनी का बैलेंस शीट काफी मजबूत है और वह पूरी तरह से डेट-फ्री (debt-free) है, जिसकी इक्विटी ₹817.83 करोड़ है।
डिविडेंड पर कोई फैसला नहीं
Financal Year 2026 के लिए बोर्ड ने कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं देने की सिफारिश की है। पिछले साल जहां निवेशकों को ₹25 प्रति शेयर का डिविडेंड मिला था, वहीं इस बार कंपनी ने यह फैसला नहीं लिया है। यह कदम, मजबूत बैलेंस शीट के बावजूद, प्रमोटर के एग्जिट (exit) और नई रणनीति की ओर इशारा कर सकता है।
आगे क्या उम्मीद करें?
Novartis AG का यह कदम कंपनी के लिए एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत है। ओपन ऑफर की शर्तें और कीमत निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू होगी। यह देखना भी अहम होगा कि नई मालिकाना हक वाली कंपनी Novartis India के लिए क्या योजनाएं लेकर आती है।
इंडस्ट्री से तुलना
भारतीय फार्मा सेक्टर में जहां Sun Pharma, Dr. Reddy's और Cipla जैसी कंपनियां अधिग्रहण और नई लॉन्चिंग के जरिए ग्रोथ दिखा रही हैं, वहीं Novartis India के रेवेन्यू में गिरावट देखी गई है। यह इंडस्ट्री की कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
