NCLT का फैसला
NCLT चेन्नई ने Apollo Hospitals Enterprise Ltd के 'कंपोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट' को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद, कंपनी अपने फार्मेसी डिस्ट्रीब्यूशन और डिजिटल हेल्थ बिज़नेस को दो अलग-अलग कंपनियों में बांटेगी। कंपनी को 9 अप्रैल 2026 को इस मंजूरी का सर्टिफाइड ऑर्डर मिला है।
क्यों हो रहा है यह बंटवारा?
इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य Apollo Hospitals के फार्मेसी डिस्ट्रीब्यूशन और डिजिटल हेल्थ बिज़नेस के लिए अलग-अलग, केंद्रित कंपनियाँ बनाना है। माना जा रहा है कि इससे हर बिज़नेस सेगमेंट को बेहतर मैनेजमेंट मिलेगा, जिससे वे बाज़ार के मौकों का ज़्यादा फायदा उठा सकेंगे। कंपनी को उम्मीद है कि इससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी और शेयरधारकों के लिए वैल्यू भी बढ़ेगी।
बंटवारे की पृष्ठभूमि
Apollo Hospitals India की एक प्रमुख इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर प्रोवाइडर है, जो अपने अस्पतालों, फार्मेसी और डिजिटल हेल्थ सेवाओं के विशाल नेटवर्क के लिए जानी जाती है। यह भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट हॉस्पिटल नेटवर्क संचालित करती है। इस डी-मर्जर योजना का आधार 2021 में Apollo HealthCo का गठन था, जिसने Apollo Pharmacy को Apollo 24/7 डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ मिलाया था। Keimed, जो कंपनी का एक महत्वपूर्ण दवा वितरण अंग है, भी इस योजना का हिस्सा है।
आगे क्या होगा?
NCLT की मंजूरी एक बड़ा मील का पत्थर है, लेकिन योजना को पूरी तरह से लागू करने के लिए शेयरधारकों और लेनदारों की अंतिम सहमति आवश्यक है। इन हितधारकों की औपचारिक मीटिंग 16-17 मई 2026 को निर्धारित की गई है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए रेगुलेटरी बॉडीज़ और स्टॉक एक्सचेंजों (BSE/NSE) से भी अंतिम अप्रूवल की दरकार होगी।
प्रतिस्पर्धा का माहौल
भारत के तेज़ी से बढ़ते ई-फार्मेसी और डिजिटल हेल्थ बाज़ार में, Apollo की नवगठित इकाइयाँ Reliance Retail (Netmeds), Tata 1mg और PharmEasy जैसे स्थापित दिग्गजों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करेंगी।
आंकड़े और लक्ष्य
इस पुनर्गठन योजना से लगभग 1,78,239 इक्विटी शेयरधारक और 6,418 अनसिक्योर्ड क्रेडिटर प्रभावित होंगे। कंपनी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य FY27 तक इस विशेष सेगमेंट में ₹25,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है।
