कंप्लायंस रिपोर्ट फाइल, पर शेयर कैंसिलेशन में अड़चन
Morepen Laboratories Limited ने FY26 (31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर) के लिए अपनी एनुअल सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट जमा कर दी है। Practicing Company Secretaries PD & Associates की ओर से तैयार की गई इस रिपोर्ट में SEBI के विभिन्न नियमों के पालन की पुष्टि की गई है।
हालांकि, इस फाइलिंग में कंपनी के कैपिटल रिडक्शन प्लान से जुड़ी एक बड़ी चुनौती का भी खुलासा हुआ है। स्टॉक एक्सचेंज ने 50,62,872 शेयर को कैंसिल करने की कंपनी की अर्जी को साफ तौर पर मना कर दिया है। इस रिजेक्शन की वजह NCLT Chandigarh द्वारा दिए गए एक पुराने आदेश की शर्तों का पूरा न होना है।
यह स्थिति Morepen Labs के कैपिटल रिस्ट्रक्चरिंग की कोशिशों में एक बड़ी रेगुलेटरी बाधा है। स्टॉक एक्सचेंज से ऐसी देरी या इनकार से निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है और कैपिटल रिडक्शन जैसे कॉर्पोरेट एक्शन के एग्जीक्यूशन को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
इससे पहले, Morepen Laboratories को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) चंडीगढ़ से करीब 50.62 लाख शेयर कैंसिल करने वाली कैपिटल रिडक्शन स्कीम के लिए मंजूरी मिली थी। NCLT की मंजूरी के बाद कंपनी ने इन कैंसिल किए गए शेयरों की लिस्टिंग और अलाइनमेंट के लिए स्टॉक एक्सचेंज में अप्लाई किया था।
नतीजतन, शेयर होल्डर्स के लिए कैपिटल रिडक्शन को पूरा करने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कंपनी को अब NCLT और SEBI दोनों से जुड़े एक जटिल रेगुलेटरी रास्ते से निकलना होगा। मैनेजमेंट के लिए इस कंप्लायंस की गड़बड़ को सुलझाना शेयर कैंसिलेशन को फाइनल करने के लिहाज़ से बहुत ज़रूरी होगा, जिसमें शायद SEBI को नए सिरे से आवेदन करने की ज़रूरत पड़े।
आगे चलकर, नए आवेदनों पर SEBI या स्टॉक एक्सचेंज से और देरी या सीधा इनकार होने का खतरा है। इसके अलावा, फिर से आवेदन करने और कंप्लायंस गैप को भरने में कंपनी की लागतें भी बढ़ सकती हैं। इस समस्या का अगर ठीक से समाधान नहीं हुआ तो कंपनी की रेप्युटेशन और निवेशकों की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।
यह कंप्लायंस इशू फार्मा सेक्टर के बड़े माहौल में आता है, जहां Sun Pharmaceutical Industries और Dr. Reddy's Laboratories जैसी कंपनियां कड़े रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत काम करती हैं। हालांकि, कैपिटल रिडक्शन जैसे मामले रोजमर्रा के ऑपरेशन्स की बजाय कॉर्पोरेट एक्शन्स से ज़्यादा जुड़े होते हैं।
अन्य डेवलपमेंट की बात करें तो, Morepen Laboratories ने Q3 FY24 में ₹50 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 22.4% ज़्यादा है। कंपनी को मई 2025 में अपने API प्लांट के लिए USFDA से अप्रूवल भी मिला था और जनवरी 2024 में मेडिकल डिवाइसेस के लिए साउथ कोरिया की KGC के साथ एक समझौता भी किया था।
आगे, निवेशक NCLT की शर्तों और एक्सचेंज की ज़रूरतों के बीच कंप्लायंस गैप को दूर करने में मैनेजमेंट की प्रगति पर बारीकी से नज़र रखेंगे। मुख्य बातों में SEBI और स्टॉक एक्सचेंज में नए आवेदन जमा करने की समय-सीमा, शेयर कैंसिलेशन के मुद्दे पर कंपनी के अगले कम्युनिकेशन और निवेशकों की ओवरऑल सेंटीमेंट पर नज़र रहेगी।
