SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' (Large Corporate) फ्रेमवर्क के तहत आने वाली कंपनियों के लिए कर्ज जुटाने के नियम अलग होते हैं। Mercury Laboratories Ltd. ने हाल ही में BSE को दी गई फाइलिंग में कन्फर्म किया है कि वह इन मानदंडों पर खरी नहीं उतरती।
कंपनी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक उसकी कुल आउटस्टैंडिंग बरोइंग्स (outstanding borrowings) सिर्फ ₹7.31 करोड़ थी। SEBI के नियमों के मुताबिक, किसी कंपनी को 'लार्ज कॉर्पोरेट' माने जाने के लिए उसका कर्ज कम से कम ₹100 करोड़ या उससे अधिक होना चाहिए, साथ ही क्रेडिट रेटिंग (credit rating) AA- या उससे ऊपर की होनी चाहिए।
Mercury Laboratories की पिछली फाइनेंशियल ईयर की क्रेडिट रेटिंग BB+/Stable थी, जो CRISIL जैसी एजेंसी ने दी थी। यह रेटिंग 'लार्ज कॉर्पोरेट' के लिए जरूरी AA- की सीमा से काफी नीचे है।
इस क्लासिफिकेशन का मतलब यह है कि Mercury Laboratories फिलहाल बड़े कॉरपोरेट्स के लिए बने विशेष डेट मार्केट (debt market) नियमों के दायरे में नहीं आएगी। इससे कंपनी के भविष्य में बड़े पैमाने पर कर्ज जुटाने या डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) के जरिए फंड जुटाने के विकल्पों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि बड़े प्लेयर्स को अक्सर ज्यादा आसान शर्तें मिलती हैं।
हालांकि, शेयरधारकों के लिए इस खुलासे से तुरंत कोई बड़ा बदलाव आने की उम्मीद नहीं है। यह सिर्फ कंपनी के वित्तीय आकार का SEBI के बेंचमार्क के मुकाबले एक तथ्यात्मक कन्फर्मेशन (factual confirmation) है। कंपनी सामान्य कॉर्पोरेट नियमों के तहत ही काम करना जारी रखेगी। यह स्थिति Mercury Laboratories को उन बड़ी फार्मा कंपनियों से अलग करती है जो अक्सर 'लार्ज कॉर्पोरेट' के योग्य होती हैं और जिनके पास फंड जुटाने के ज्यादा रास्ते होते हैं।
