ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार का असर कंपनी के EBITDA पर भी दिखा, जो 64% बढ़कर ₹1,826 करोड़ हो गया। प्रति शेयर आय (EPS) भी 148% की भारी उछाल के साथ ₹16.4 पर पहुँच गई। लाऊरस लैब्स ने शेयरधारकों को ₹1.20 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) भी दिया है।
इस जबरदस्त ग्रोथ के पीछे कंपनी के CDMO (कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन) और जेनेरिक (Affordable Medicines) डिविजन का मजबूत प्रदर्शन रहा। CDMO सेगमेंट के रेवेन्यू में 36% की शानदार बढ़ोतरी हुई, जबकि जेनेरिक डिविजन ने 18% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की।
कंपनी अपनी भविष्य की ग्रोथ के लिए रणनीतिक निवेश कर रही है। FY26 में ₹1,070 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) किया गया। इसके अलावा, विशाखापत्तनम (Vizag) में 532 एकड़ में एक नया बड़ा मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए अगले आठ सालों में लगभग $600 मिलियन (करीब ₹5,000 करोड़) का निवेश करने की योजना है। हाल ही में, Antibody-drug conjugate (ADC) टेक्नोलॉजी के लिए Aarvik Therapeutics में हिस्सेदारी खरीदना भी एक अहम कदम है।
इन नतीजों से लाऊरस लैब्स के डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल और मजबूत एग्जीक्यूशन की पुष्टि होती है। कंपनी का नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो भी FY25 के 2.3x से सुधरकर FY26 में 1.3x हो गया है, जो बेहतर वित्तीय सेहत दर्शाता है।
लाऊरस लैब्स फार्मा सेक्टर की अन्य प्रमुख कंपनियों जैसे Divi's Laboratories, Syngene International, Dr. Reddy's Laboratories, और Sun Pharmaceutical Industries के साथ प्रतिस्पर्धी बाजार में काम करती है।
