ऑपरेशनल लीडरशिप को मिला नया चेहरा
Gland Pharma, जो कि एक प्रमुख भारतीय जेनेरिक इंजेक्टेबल मैन्युफैक्चरर और कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) है, ने प्रसाद राव लिसेट्टी को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ ऑपरेशंस के पद पर नियुक्त किया है। यह बड़ी नियुक्ति 6 अप्रैल 2026 से लागू होगी। लिसेट्टी के पास फार्मा मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशंस के क्षेत्र में 25 वर्षों से भी ज्यादा का गहरा अनुभव है।
लीडरशिप टीम में बड़ा इजाफा
इस नियुक्ति से Gland Pharma की सीनियर लीडरशिप टीम को काफी मजबूती मिलेगी। ऑपरेशंस के हेड के तौर पर, लिसेट्टी कंपनी की महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं और सप्लाई चेन की देखरेख करेंगे। ग्लोबल फार्मा इंजेक्टेबल मार्केट में अपनी मजबूत पहचान रखने वाली Gland Pharma के लिए यह भूमिका उत्पादन के उच्च मानकों को बनाए रखने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
हालिया लीडरशिप बदलाव
Gland Pharma हाल के दिनों में कई लीडरशिप बदलावों से गुजरी है। कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) सतनाम सिंह लूम्बा 31 मार्च 2026 को रिटायर हो गए, जबकि सीईओ श्यामकांत गिरी ने 30 अप्रैल 2026 से इस्तीफा दे दिया। गिरी ने श्रीनिवास सडू की जगह ली थी, जो फिलहाल एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने हुए हैं। वहीं, फरवरी 2026 में डॉ. जितेंद्र गंगवाल रिसर्च एंड डेवलपमेंट के वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर कंपनी से जुड़े थे।
मैन्युफैक्चरिंग और मार्केट पोजीशन पर फोकस
फार्मा मैन्युफैक्चरिंग में अपने विस्तृत अनुभव के साथ, लिसेट्टी की नियुक्ति से Gland Pharma के ऑपरेशनल लीडरशिप को और बल मिलने की उम्मीद है। यह कदम भारत और यूरोप में अपनी फैcilities में मैन्युफैक्चरिंग एफिशिएंसी और प्रभावशीलता को बढ़ाने की कंपनी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जेनेरिक इंजेक्टेबल और CDMO सेवाओं के प्रतिस्पर्धी ग्लोबल मार्केट में, Gland Pharma की स्थिति को बनाए रखने और मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए मजबूत ऑपरेशनल मैनेजमेंट बेहद जरूरी है।
चुनौतियां और इंडस्ट्री का माहौल
Gland Pharma कुछ अन्य व्यावसायिक पहलुओं का भी सामना कर रही है। कंपनी पर ₹6.29 करोड़ का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) डिमांड है, जिसे वह चुनौती देने की योजना बना रही है। FY23 में कंपनी के प्रदर्शन पर सप्लाई चेन में बाधाएं, क्लाइंट इन्वेंट्री एडजस्टमेंट और प्रोडक्शन शटडाउन का असर पड़ा था, जिससे मार्जिन और रेवेन्यू में कमी आई। प्राइसिंग प्रेशर और रेगुलेटरी चुनौतियों को लेकर चिंताओं के चलते कुछ एनालिस्ट ने मार्च 2026 तक 'Sell' रेटिंग बनाए रखी है। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सन फार्मा, सिप्ला और ज़ाइडस लाइफसाइंसेज जैसी अन्य प्रमुख भारतीय फार्मा कंपनियों में भी मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं और ग्लोबल रीच पर जोर दिया जाता है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि लिसेट्टी का नेतृत्व ऑपरेशनल एफिशिएंसी और आउटपुट को कैसे प्रभावित करता है, और Gland Pharma पिछली चुनौतियों व मौजूदा रेगुलेटरी मामलों से कैसे निपटती है।
