FY2026 का प्रदर्शन और आगे की राह
कंपनी के पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजों के मुताबिक, रेवेन्यू में 2% की मामूली बढ़ोतरी हुई है, जबकि EBITDA में 11% का मजबूत उछाल आया, जिससे मार्जिन 34% पर पहुंच गया। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 10% की वृद्धि देखी गई, जो ₹1,000 करोड़ के पार गया।
चौथी तिमाही में आईं दिक्कतें, पर समाधान भी
हालांकि, चौथी तिमाही (Q4 FY2026) में एक कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CMO) से जुड़ी सप्लाई चेन की समस्या के चलते कंपनी की टॉप-लाइन ग्रोथ पर 3-3.5% का नकारात्मक असर पड़ने का अनुमान है। इन चुनौतियों के बीच, शेयरधारकों को ₹57 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (dividend) दिया गया है।
FY27 में डबल-डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य
कंपनी का कहना है कि सप्लाई चेन की दिक्कतें अब दूर हो गई हैं, जिससे FY2027 में डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा। इस ग्रोथ को कंपनी की इनोवेशन पाइपलाइन से भी काफी मदद मिलेगी, जिसने Q4 में 6% रेवेन्यू का योगदान दिया और जिसे 10% तक ले जाने का लक्ष्य है। मैनेजमेंट नए ग्रोथ एरिया जैसे ऑन्कोलॉजी (oncology) और रेस्पिरेटरी (respiratory) थेरेपीज़ में निवेश बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है। साथ ही, वैक्सीन और जनरल मेडिसिन जैसे स्थापित सेगमेंट को भी मजबूत किया जा रहा है। कंपनी GenAI और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।
भविष्य की संभावनएँ और जोखिम
GSK Pharma India के पाइपलाइन में हेपेटाइटिस बी के लिए Bepirovirsen और मल्टीपल मायलोमा के लिए Blenrep जैसे नए प्रोडक्ट्स भी हैं, जो भविष्य में कमाई बढ़ा सकते हैं। हालांकि, नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) के तहत कुछ दवाइयों की प्राइसिंग पर लगी पाबंदियों (pricing restrictions) से कुछ खास सेगमेंट में ग्रोथ सीमित रह सकती है। साथ ही, CMOs पर निर्भरता के कारण सप्लाई चेन की दिक्कतें फिर से खड़ी हो सकती हैं।