Dr Reddy's के मुनाफे में भारी गिरावट, वजह बने एकमुश्त खर्चे
Dr. Reddy's Laboratories ने FY26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के ₹1,586.70 करोड़ से गिरकर ₹221.30 करोड़ पर आ गया, जो 86.05% की भारी गिरावट दर्शाता है।
₹700 करोड़ से ज्यादा के एकमुश्त खर्चे बने कारण
कंपनी के प्रॉफिट में इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह ₹700 करोड़ से अधिक के एकमुश्त खर्चे (one-time charges) रहे। इनमें अमेरिका में जेनेरिक दवा Lenalidomide की कीमतों में एडजस्टमेंट के कारण ₹453.00 करोड़ की रेवेन्यू कटौती, CAR-T थेरेपी R&D प्रोग्राम बंद करने से ₹135.00 करोड़ का नेट लॉस, एक संघीय टैक्स ऑडिट के बाद ₹114.10 करोड़ का प्रोविजन और नए लेबर कोड के कारण ₹117.00 करोड़ के अतिरिक्त लेबर कॉस्ट शामिल हैं।
पूरे साल का रेवेन्यू बढ़ा, डिविडेंड की घोषणा
तिमाही में भारी गिरावट के बावजूद, कंपनी का पूरे फाइनेंशियल ईयर FY26 का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 3.90% बढ़कर ₹35,058.60 करोड़ रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर FY25 में ₹33,741.20 करोड़ था। इस बीच, कंपनी के बोर्ड ने FY26 के लिए ₹8 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है।
नतीजों पर विश्लेषकों की राय और भविष्य की चिंताएं
ये नतीजे कंपनी की तात्कालिक मुनाफा कमाने की क्षमता पर दबाव दिखाते हैं। हालांकि, सालाना रेवेन्यू में मजबूती है, पर इन गैर-आवर्ती (non-recurring) घटनाओं का बॉटम लाइन पर बड़ा असर भविष्य की प्रॉफिट मार्जिन पर सवाल खड़े करता है। फार्मा सेक्टर में अप्रत्याशित रेगुलेटरी माहौल, मार्केट एक्सेस और स्ट्रेटेजिक पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का असर दिखता है।
तुलना और मुख्य जोखिम
Dr. Reddy's के तिमाही नतीजे प्रतिस्पर्धियों Sun Pharmaceutical Industries, Cipla और Zydus Lifesciences से अलग हैं, जिन्होंने इसी अवधि में रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट में ग्रोथ दर्ज की थी। इससे पता चलता है कि Dr. Reddy's की गिरावट कंपनी विशेष कारणों से थी। मुख्य जोखिमों में अमेरिकी जेनेरिक कीमतों का दबाव, टैक्स प्रोविजन का अंतिम नतीजा, R&D प्रोग्राम में बदलाव और ₹3,804.50 करोड़ से बढ़कर ₹6,293.50 करोड़ हुए करंट बोरिंग्स का प्रबंधन शामिल है।
