रेवेन्यू में थोड़ी ग्रोथ, पर नतीजों पर प्रोविजन्स का भारी असर
जहां पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) में Dr Reddy's का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹335,933 Mn रहा, जो पिछले साल (FY25) के ₹325,535 Mn से 3.2% ज्यादा है, वहीं चौथी तिमाही (Q4 FY26) में रेवेन्यू 11.6% घटकर ₹75,162 Mn पर पहुंच गया।
Q4 में प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में भारी गिरावट आई, यह ₹15,939 Mn (Q4 FY25) से गिरकर ₹2,201 Mn (Q4 FY26) हो गया। कंपनी ने इस बड़ी गिरावट के लिए विशेष प्रोविजन्स (प्रावधान) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के कुछ प्रोग्राम्स बंद करने को जिम्मेदार ठहराया है, जिसका असर कंपनी के नतीजों पर साफ दिखा।
बोर्ड ने ₹8 डिविडेंड की सिफारिश की, ऑडिटर भी बदला
नतीजों के साथ, कंपनी के बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के बाद ₹8 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की सिफारिश की है। यह शेयरधारकों के लिए एक अच्छी खबर है।
इसके अलावा, कंपनी के बोर्ड में श्रीकांत वेमाकन्नी (Srikanth Velamakanni) को एडिशनल डायरेक्टर (इंडिपेंडेंट) के तौर पर शामिल किया गया है। साथ ही, अगले पांच सालों के लिए Deloitte Haskins & Sells, LLP को नया स्टेटुटरी ऑडिटर (वैधानिक लेखा परीक्षक) नियुक्त किया गया है, जो एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
सेक्टर की चुनौतियां और आगे की राह
यह नतीजे फार्मा सेक्टर की कड़ी प्रतिस्पर्धा को भी दर्शाते हैं, जहां Sun Pharma, Cipla और Lupin जैसी कंपनियां भी लगातार R&D निवेश, रेगुलेटरी चुनौतियों और प्राइसिंग दबाव का सामना कर रही हैं। निवेशकों की नजर अब कंपनी के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर रहेगी कि Q4 में प्रोविजन्स और R&D राइट-ऑफ्स के पीछे क्या कारण थे और आगे कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी क्या होगी।
मुख्य फाइनेंशियल आंकड़े:
- FY26 कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू: ₹335,933 Mn (FY25 में ₹325,535 Mn)
- Q4 FY26 कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू: ₹75,162 Mn (Q4 FY25 में ₹85,060 Mn)
- FY26 प्रॉफिट आफ्टर टैक्स: ₹42,850 Mn (FY25 में ₹56,544 Mn)
- Q4 FY26 प्रॉफिट आफ्टर टैक्स: ₹2,201 Mn (Q4 FY25 में ₹15,939 Mn)
