अधिग्रहणों ने बदली तस्वीर, EBITDA में 22.3% की बढ़त
Corona Remedies के लिए FY26 कई मायनों में शानदार रहा। कंपनी की आय (Revenue) तो 17.3% बढ़ी ही, साथ ही EBITDA में भी 22.3% का जबरदस्त इजाफा देखा गया, जो ₹293.4 करोड़ रहा। चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी और रेवेन्यू में 20.2% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ के साथ यह ₹353.1 करोड़ पर पहुंच गया।
Wokadine® और Bayer Zydus के ब्रांड्स बने गेम-चेंजर
कंपनी के इस बेहतरीन प्रदर्शन के पीछे कुछ बड़ी रणनीतिक चालें थीं। Corona Remedies ने करीब ₹6,481 करोड़ के बड़े पोविडोन आयोडीन (Povidone Iodine) मार्केट में एंट्री करते हुए Wokadine® ब्रांड का अधिग्रहण किया। इसके अलावा, Bayer Zydus Pharma Ltd. से सात ब्रांड्स को खरीदना भी कंपनी की ग्रोथ के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ।
यूरेशियन मार्केट में एंट्री, उत्पादन क्षमता भी बढ़ाई
एक और बड़ी खबर यह है कि कंपनी की Bhayla फैसिलिटी को EAEU-GMP (यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) सर्टिफिकेशन मिल गया है। इससे कंपनी लगभग 25 बिलियन डॉलर के यूरेशियन मार्केट में अपने प्रोडक्ट्स बेच पाएगी। साथ ही, इस फैसिलिटी में टैबलेट्स और कैप्सूल के लिए 400 मिलियन यूनिट्स की उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा रही है।
IPO की तैयारी, दांव पर 25 बिलियन डॉलर का मार्केट
Corona Remedies, जो एंटी-इन्फेक्टिव्स, पेन मैनेजमेंट, कार्डियोलॉजी और डर्मेटोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है, अब अपने आईपीओ (IPO) के लिए कमर कस चुकी है। कंपनी का लक्ष्य भारतीय फार्मास्युटिकल मार्केट (IPM) की ग्रोथ रेट से दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ना है। दिसंबर 2025 में कंपनी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट होने की योजना बना रही है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
यह सब अधिग्रहण और बाजार विस्तार निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी को यूरेशियन जैसे बड़े बाजारों में एंट्री का मौका मिलेगा और बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता से वह बढ़ती डिमांड को पूरा कर सकेगी। आगामी आईपीओ से कंपनी को भविष्य के विकास के लिए फंड जुटाने में मदद मिलेगी।
