क्यों गिरी Cipla की Profitability?
Cipla लिमिटेड ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के नतीजे जारी किए, जिसमें कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 26.71% की भारी गिरावट देखी गई, जो पिछले साल ₹5,269.20 करोड़ था।
इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के टोटल एक्सपेंसेस (Total Expenses) में हुई बढ़ोतरी है। कंसॉलिडेटेड खर्चे ₹21,588.68 करोड़ से बढ़कर ₹23,545.06 करोड़ हो गए। इसके अलावा, नए भारतीय लेबर कोड (Indian Labour Codes) के कारण हायर ग्रेच्युटी और लीव कॉस्ट की वजह से ₹275.91 करोड़ का एक-मुश्त स्पेशल चार्ज (One-time exceptional charge) भी मुनाफे पर भारी पड़ा।
इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) में 2.24% का इजाफा हुआ और यह ₹29,044.60 करोड़ पर पहुंच गया।
प्रमुख जोखिम: NPPA लिटिगेशन
Cipla के लिए एक बड़ा सिरदर्द नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के साथ चल रहा कानूनी मामला है। कंपनी पर ₹2,011 करोड़ की देनदारी का नोटिस है, जो इसके भविष्य के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम पैदा कर सकता है।
शेयरधारकों के लिए डिविडेंड
कंपनी ने शेयरधारकों को खुश करते हुए ₹13 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) की सिफारिश की है।
उधार में बढ़ोतरी
एक और अहम बात यह है कि कंपनी के नॉन-करंट बोरिंग्स (Non-current borrowings) में भी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है, जो पिछले साल ₹11.98 करोड़ से बढ़कर ₹117.47 करोड़ हो गए हैं। यह संभावित निवेश या नई फाइनेंसिंग का संकेत हो सकता है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि Cipla बढ़ती परिचालन लागतों को कैसे मैनेज करती है और NPPA लिटिगेशन के मामले में क्या होता है।
