Bajaj Healthcare Ltd. ने अपने ऑडिटेड स्टैंडअलोन फाइनेंशियल रिजल्ट्स पेश किए हैं, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2026 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के लिए कंपनी का मुनाफा 50% घटकर ₹2131.04 लाख (यानी ₹21.31 करोड़) रह गया। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में ₹4292.88 लाख (यानी ₹42.93 करोड़) था। वहीं, कंपनी के ऑपरेशन से होने वाली कमाई यानी रेवेन्यू में 12% की अच्छी ग्रोथ देखी गई, जो बढ़कर ₹61103.14 लाख (यानी ₹611.03 करोड़) तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹54260.24 लाख (यानी ₹542.60 करोड़) था।
कंपनी के प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में भी खासी गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले साल के ₹4601.77 लाख (लगभग ₹46.01 करोड़) से घटकर इस साल ₹2892.30 लाख (लगभग ₹28.92 करोड़) रह गया।
मुनाफे में गिरावट का कारण
रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफे में यह बड़ी गिरावट मार्जिन पर दबाव (margin pressure) की ओर इशारा करती है। ऐसा माना जा रहा है कि माल की लागत (cost of goods sold) बढ़ने या बाजार में कीमतों को लेकर चुनौतियों के चलते कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी प्रभावित हुई है। इससे पहले, ग्राहकों की टाइमलाइन संबंधी समस्याओं के कारण ₹3,324.66 लाख की आय का रिवर्सल (income reversal) भी कंपनी के ग्रोथ ट्रैक पर असर डाल चुका था।
शेयरधारकों के लिए क्या?
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शेयरधारकों की मंजूरी मिलने पर 30% का फाइनल डिविडेंड (प्रति शेयर ₹1.50) देने की सिफारिश की है। इसे आने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में पेश किया जाएगा।
ऑडिटर नियुक्ति और रणनीतिक कदम
नए इंटरनल ऑडिटर्स के तौर पर JCR & Co. LLP को नियुक्त किया गया है, जबकि V.J. Talati & Co. को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर के रूप में फिर से चुना गया है। कंपनी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs), इंटरमीडिएट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स के क्षेत्र में काम करती है। Genrx Pharmaceuticals Private Limited के प्रस्तावित अधिग्रहण पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से मंजूरी का इंतजार है, जिसे कंपनी अपनी सब्सिडियरी बनाने और ऑपरेशन्स का विस्तार करने के लिए महत्वपूर्ण मान रही है।
निवेशकों की नजरें कहाँ?
निवेशकों की नजरें अब कंपनी की लागत प्रबंधन (cost management) और बाजार की कीमतों को प्रभावी ढंग से संभालने की क्षमता पर होंगी। Genrx Pharmaceuticals के अधिग्रहण को लेकर NCLT की मंजूरी का इंतजार भी एक अहम फैक्टर रहेगा। हालांकि, डिविडेंड की सिफारिश शेयरधारकों के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाती है, लेकिन मुनाफे में गिरावट भविष्य के भुगतान और अर्निंग ग्रोथ की स्थिरता पर सवाल खड़े करती है।
