क्यों लगाई गई ट्रेडिंग पर रोक?
कंपनी ने यह फैसला SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत लिया है। इसके तहत, कंपनी के सभी 'डेजिग्नेटेड पर्सन्स' (Designated Persons), उनके करीबी रिश्तेदार और कंपनी से जुड़े अन्य लोग 1 अप्रैल 2026 से लेकर नतीजों की घोषणा होने तक Aashka Hospitals के शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) को रोकना है, यानी ऐसी सूचनाओं का गलत इस्तेमाल जो अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं (Unpublished Price Sensitive Information - UPSI)।
कंपनी की चिंताजनक परफॉर्मेंस
हालांकि यह एक सामान्य कॉर्पोरेट प्रक्रिया है, लेकिन Aashka Hospitals के निवेशकों के लिए कंपनी की पुरानी परफॉर्मेंस चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले 5 सालों में कंपनी के रेवेन्यू में सालाना -0.25% की गिरावट आई है, जबकि इंडस्ट्री की औसत ग्रोथ 24.67% रही है। इसी दौरान, कंपनी का मार्केट शेयर भी 1.3% से घटकर सिर्फ 0.36% रह गया है। सितंबर 2025 में खत्म हुई छमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) भी घटकर ₹78.00 लाख हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹161.85 लाख था।
प्रतिस्पर्धी माहौल और आगे की राह
गांधीनगर स्थित Aashka Hospitals, Apollo Hospitals, Max Healthcare और Fortis Healthcare जैसे बड़े हेल्थकेयर प्लेयर्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है। ऐसे में, कंपनी के लिए आगे की राह आसान नहीं है। निवेशकों को कंपनी के अगले बोर्ड मीटिंग के नतीजों का इंतजार करना होगा, जिसके बाद 48 घंटे के भीतर ट्रेडिंग विंडो फिर से खोल दी जाएगी।
