प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू: FY26 से पैकेजिंग में रीसाइकल्ड प्लास्टिक होगा जरूरी
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है। ये नए नियम वितीय वर्ष (Financial Year) 2025-26 से पैकेजिंग में रीसाइकल्ड प्लास्टिक कंटेंट के इस्तेमाल को अनिवार्य बनाते हैं। इसका सीधा असर मैन्युफैक्चरर्स, इम्पोर्टर्स और ब्रांड ओनर्स पर पड़ेगा, जिन्हें अपने उत्पादों में एक निश्चित प्रतिशत रीसाइकल्ड सामग्री का उपयोग करना होगा।
टारगेट क्या हैं?
नए नियमों के तहत, प्लास्टिक पैकेजिंग को तीन कैटेगरी में बांटा गया है और सभी के लिए साल-दर-साल रीसाइकल्ड कंटेंट के लक्ष्य तय किए गए हैं:
- कैटेगरी I पैकेजिंग (जैसे कठोर कंटेनर): वितीय वर्ष 2025-26 में न्यूनतम 30% रीसाइकल्ड कंटेंट जरूरी होगा, जो 2028-29 से बढ़कर 60% तक हो जाएगा।
- कैटेगरी II पैकेजिंग (जैसे फ्लेक्सिबल फिल्म्स): 2025-26 में 10% रीसाइकल्ड कंटेंट की जरूरत होगी, जो 2028-29 से 20% हो जाएगा।
- कैटेगरी III पैकेजिंग (अन्य प्रकार): 2025-26 में 5% से शुरू होकर, 2028-29 से यह 10% हो जाएगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह रेगुलेटरी बदलाव पैकेजिंग इंडस्ट्री को अधिक सस्टेनेबल (Sustainable) और सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) की ओर ले जाने में एक बड़ा कदम है। इन नियमों का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना और प्लास्टिक सामग्री के जीवनचक्र को अधिक जिम्मेदार बनाना है।
आगे क्या चुनौतियाँ हैं?
- सप्लाय की दिक्कतें: रीसाइकल्ड प्लास्टिक सामग्री की लगातार और अच्छी क्वालिटी वाली सप्लाई सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
- खर्च का असर: रीसाइकल्ड कंटेंट के इस्तेमाल से उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।
- लागू करने में मुश्किल: इतनी बड़ी इंडस्ट्री में इन लक्ष्यों की निगरानी और कम्प्लायंस (Compliance) सुनिश्चित करना कठिन होगा।
- तकनीकी व्यवहार्यता: कुछ खास इस्तेमाल के लिए, प्रोडक्ट की क्वालिटी या सेफ्टी से समझौता किए बिना जरूरी रीसाइकल्ड कंटेंट को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
- इन नियमों के गजट नोटिफिकेशन की आधिकारिक तारीख, जिससे यह प्रभावी होंगे।
- मैन्युफैक्चरर्स, इम्पोर्टर्स और ब्रांड ओनर्स (PIBOs) की नई योजनाओं और निवेशों पर नजर रखनी होगी, ताकि वे बढ़ते रीसाइकल्ड कंटेंट के लक्ष्यों को पूरा कर सकें।
- सेंट्रल पोल्यूशन कण्ट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा विकसित किए जा रहे ऑनलाइन पोर्टल की कार्यप्रणाली।
- मार्केट में हाई-क्वालिटी रीसाइकल्ड प्लास्टिक रेजिन की उपलब्धता और कीमत।