यह गिरावट पिछले सालों की तुलना में काफी चिंताजनक है। कंपनी के FY23 के नतीजे शानदार थे, जहाँ ₹42,406.59 करोड़ का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू और ₹4,625.42 करोड़ का मुनाफा (Profit) था।
FY26 में, कंपनी का कंसॉलिडेटेड टोटल इनकम गिरकर ₹105.04 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल के मुकाबले 75.23% कम है। इसी तरह, स्टैंडअलोन टोटल इनकम में भी 43.35% की गिरावट आई और यह ₹102.85 करोड़ रहा। कंपनी ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड, दोनों ही मोर्चों पर नेट लॉस दर्ज किया है, क्योंकि खर्चों ने आय को काफी पीछे छोड़ दिया।
इस भारी रेवेन्यू गिरावट से कंपनी के बिजनेस मॉडल या कार्बन क्रेडिट्स की मांग में अंडरलाइंग इश्यूज का पता चलता है। खर्चों का आय से ज्यादा होना वित्तीय दबाव का संकेत देता है। इसके अलावा, स्टैंडअलोन शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग्स में भारी उछाल आया है। यह FY25 के ₹0.24 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹5.12 करोड़ हो गया है, जो लिक्विडिटी (Liquidity) पर दबाव का संकेत दे सकता है।
हालांकि, इन मुश्किलों के बीच EKI Energy को रेगुलेटरी क्लेरिटी (Regulatory Clarity) मिली है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) ने ऑडिटर की चिंताओं को दूर कर दिया है, और BSE ने कंपनी की डीमर्जर (Demerger) योजना पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की है। शेयरहोल्डर्स के लिए अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन जनरेशन बिजनेस सेगमेंट के प्रपोज्ड डीमर्जर से ऑपरेशन्स सुव्यवस्थित हो सकते हैं।
भारत में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग सेक्टर में सीधे लिस्टेड पीयर्स (Peers) कम हैं। Waaree Renewable Technologies Ltd. जैसी कंपनियां, जो रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस में हैं, उन्होंने FY24 में ₹460.08 करोड़ का रेवेन्यू और ₹7.93 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था।
अब निवेशकों की नजरें डीमर्जर की प्रगति और कंपनी की रेवेन्यू रिकवरी व कॉस्ट मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी पर रहेंगी।
