BPCL पर ₹1 करोड़ का भारी जुर्माना! NGT ने Emission Controls में देरी पर कसा शिकंजा

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AuthorNeha Patil|Published at:
BPCL पर ₹1 करोड़ का भारी जुर्माना! NGT ने Emission Controls में देरी पर कसा शिकंजा
Overview

Bharat Petroleum Corporation Ltd (BPCL) को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से बड़ा झटका लगा है। ट्रिब्यूनल ने कंपनी पर Vapour Recovery Systems (VRS) की स्थापना में देरी के कारण **₹1 करोड़** का पर्यावरण मुआवजा भरने का आदेश दिया है। यह जुर्माना कंपनी की **41** स्टोरेज लोकेशन्स पर मार्च **2024** तक VRS लगाने की मूल डेडलाइन चूकने के कारण लगाया गया है।

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NGT का BPCL पर ₹1 करोड़ का जुर्माना, उत्सर्जन नियंत्रण में देरी पर कार्रवाई

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) को ₹1 करोड़ का पर्यावरण मुआवजा (environmental compensation) देने का निर्देश दिया है। यह पेनल्टी कंपनी द्वारा अपनी 41 स्टोरेज सुविधाओं पर वेपर रिकवरी सिस्टम्स (VRS) लगाने की मार्च 2024 की मूल डेडलाइन का पालन न करने पर लगाई गई है। BPCL ने पुष्टि की है कि सभी 41 प्रभावित लोकेशन्स पर VRS की स्थापना मार्च 2025 तक पूरी कर ली गई है और कंपनी का कहना है कि इससे उसके फाइनेंशियल्स पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

NGT का यह आदेश तेल क्षेत्र में उत्सर्जन नियंत्रण (emission controls) पर नियामक प्राधिकरणों के बढ़ते फोकस को दर्शाता है। सरकारी उपक्रमों (PSUs) के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि वे पर्यावरण संबंधी नियमों का तुरंत पालन करें ताकि ऐसे जुर्माने से बचा जा सके और गवर्नेंस मानकों को बनाए रखा जा सके।

BPCL और अन्य ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा वेपर रिकवरी सिस्टम्स (VRS) लगाने का निर्देश दिया गया था। ये सिस्टम्स हवा के प्रदूषण को कम करने और फ्यूल स्टोरेज व डिस्पेंसिंग से होने वाले वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड (VOC) के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी हैं। VRS लागू करने की मूल मार्च 2020 की डेडलाइन को इन कंपनियों के विशाल नेटवर्क और कई सुविधाओं को रेट्रोफिट करने की लॉजिस्टिकल चुनौतियों के कारण बढ़ाया गया था, जिसे बाद में संशोधित करके मार्च 2024 किया गया था।

मार्च 2025 तक सभी 41 स्टोरेज लोकेशन्स पर VRS की स्थापना पूरी होने के साथ, BPCL ने उस कंप्लायंस मुद्दे को सुलझा लिया है जिसके कारण NGT ने पेनल्टी लगाई थी। कंपनी के बयान से यह संकेत मिलता है कि ₹1 करोड़ के मुआवजे के भुगतान या कंप्लायंस प्रयासों का उसके वित्तीय संचालन पर कोई खास असर नहीं हुआ है।

हालांकि BPCL ने कंप्लायंस की पुष्टि की है और किसी खास वित्तीय प्रभाव की रिपोर्ट नहीं दी है, NGT और CPCB जैसे निकायों द्वारा नियामक निगरानी ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक निरंतर कारक बनी हुई है। भविष्य में किसी भी देरी या गैर-अनुपालन से और अधिक पेनल्टी लग सकती है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी अन्य प्रमुख कंपनियां भी VRS इंस्टॉलेशन के लिए इसी तरह के निर्देशों और डेडलाइन का सामना कर चुकी हैं। वे अपने बड़े नेटवर्क में पूर्ण कंप्लायंस की दिशा में काम कर रही हैं, जो उत्सर्जन नियंत्रण पर उद्योग के व्यापक फोकस को दर्शाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.