यह पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) Waaree Forever Energies Four Private Limited नाम की कंपनी की व्हॉली-ओन्ड स्टेप-डाउन सब्सिडियरी द्वारा SECI के साथ 6 मई 2026 को साइन किया गया है। यह प्रोजेक्ट गुजरात के द्वारका (Dwarka) में 300MW क्षमता का विंड पावर प्रोजेक्ट होगा।
Waaree Energies, जो मुख्य रूप से सोलर एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट में अपनी धाक जमाए हुए है, अब विंड एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा कदम उठा रही है। इस 300MW के प्रोजेक्ट से कंपनी अपने रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो को और डाइवर्सिफाई (diversify) कर रही है और भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन (clean energy transition) में अपनी पोजीशन को मजबूत कर रही है। SECI जैसे सरकारी संस्था के साथ यह PPA इस नए विंड वेंचर के लिए भरोसेमंद, लंबे समय के रेवेन्यू (revenue) को सुनिश्चित करता है।
कंपनी की बात करें तो, Waaree Energies की स्थापना 1990 में हुई थी और यह भारत की सबसे बड़ी सोलर PV मॉड्यूल मैन्युफैक्चरर है। इसका बिजनेस EPC सर्विसेज, सोलर सेल्स और एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस तक फैला हुआ है। कंपनी ने फरवरी 2026 में SECI से इस 300MW विंड प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LOA) मिलने की घोषणा की थी, जिसका यह PPA एग्जीक्यूशन (execution) एक कन्फर्मेशन है।
इस डील का सबसे बड़ा असर यह है कि Waaree Energies अपने सोलर बेस को बढ़ाते हुए महत्वपूर्ण विंड कैपेसिटी (capacity) जोड़ रही है, जिससे इसके रिन्यूएबल जनरेशन सोर्स डाइवर्सिफाई होंगे। SECI के साथ 25 साल का PPA इस नए प्रोजेक्ट से लगातार, लंबे समय तक कैश फ्लो (cash flow) देगा। यह कदम कंपनी को यूटिलिटी-स्केल क्लीन एनर्जी मार्केट में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर स्थापित करता है।
हालांकि, कंपनी के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं। SECI और स्टॉक एक्सचेंजों के साथ ग्रुप कंपनियों के कुछ लीगल इश्यूज (legal issues) पहले भी सामने आए हैं। हाल ही में, US एंटी-डंपिंग ड्यूटी (anti-dumping duty) और FY26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में EBITDA मार्जिन में आई कमी ने कंपनी के स्टॉक में वोलेटिलिटी (volatility) लाई है। विंड प्रोजेक्ट्स में पॉलिसी में बदलाव, ग्रिड कनेक्शन में देरी और एग्जीक्यूशन जैसी सामान्य चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
Waaree Energies अब इस सेक्टर में Adani Green Energy, ReNew Power, और Tata Power Renewable Energy जैसे बड़े खिलाड़ियों से सीधा मुकाबला करेगी। वहीं, Suzlon Energy जैसे कंपनियाँ इस स्पेस में मुख्य टरबाइन मैन्युफैक्चरर (turbine manufacturer) और सॉल्यूशन प्रोवाइडर (solution provider) हैं।
फाइनेंशियल (financial) स्थिति पर नजर डालें तो, Q2 FY25 में Waaree Energies के कुल रेवेन्यू का 85.42% हिस्सा सोलर PV मॉड्यूल से आया था, जो इसके डाइवर्सिफिकेशन (diversification) की जरूरत को दिखाता है। Q4 FY26 में कंपनी ने ₹1,061.1 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट और ₹8,480.25 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, भले ही इस दौरान EBITDA मार्जिन में कुछ गिरावट आई।
आगे चलकर, निवेशक इस प्रोजेक्ट के कमीशनिंग (commissioning) टाइमलाइन और पावर सप्लाई शुरू होने का इंतजार करेंगे। प्रोजेक्ट के लिए फाइनेंशियल क्लोजर (financial closure) और फंड जुटाना अगले अहम कदम होंगे। Waaree की भविष्य में और विंड प्रोजेक्ट्स के डेवलपमेंट और बिड (bid) में हिस्सा लेने की स्ट्रैटेजी (strategy) पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।
