मुंद्रा प्लांट में लौटी बिजली की बहार
Tata Power के 4,150 MW क्षमता वाले मुंद्रा पावर प्लांट ने 1 अप्रैल 2026 से एक बार फिर संचालन शुरू कर दिया है। इस बड़े प्लांट के दोबारा चालू होने से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
वित्तीय मुश्किलों से वापसी
यह प्लांट, जो पूरी तरह इंपोर्टेड कोल (imported coal) पर निर्भर है, लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रहा था। इंडोनेशियाई नियमों में बदलाव और इंपोर्टेड कोल की आसमान छूती कीमतों के कारण कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। इन दिक्कतों के चलते, Tata Power का नेट वर्थ (net worth) ₹3,800 करोड़ से ज्यादा कम हो गया था।
लंबे निलंबन के बाद बहाल
वित्तीय घाटे के कारण, प्लांट को पिछले साल 1 जुलाई 2025 से निलंबित कर दिया गया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ईंधन लागत की वसूली (fuel cost recovery) के लिए सरकार का जो प्रावधान था, उसकी समय सीमा खत्म हो गई थी। इस लंबे निलंबन के दौरान, फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के पहले नौ महीनों में प्लांट को करीब ₹800 करोड़ का घाटा हुआ।
सरकारी हस्तक्षेप और टैरिफ डील
प्लांट को फिर से शुरू करने की राह तब खुली जब गुजरात सरकार ने एक सप्लीमेंट्री पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) को मंजूरी दी। इस डील के तहत, इंपोर्टेड फ्यूल की बढ़ी हुई लागत को बिजली खरीदारों से वसूलने की अनुमति मिल गई। इसके बाद, भारत के पावर मिनिस्ट्री (Power Ministry) ने गर्मी के मौसम में बिजली की संभावित मांग को पूरा करने के लिए प्लांट को तत्काल बहाल करने का निर्देश जारी किया।
भविष्य की राह और अहमियत
इस फैसले से Tata Power की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। मुंद्रा प्लांट से रेवेन्यू (revenue) जनरेशन फिर से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस (financial performance) को मजबूती मिलेगी। अब गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों को निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा सकेगी।
हालांकि, कंपनी को अभी भी इंपोर्टेड कोल की कीमतों और ग्लोबल सप्लाई चेन (global supply chain) की स्थिरता पर निर्भर रहना होगा। भविष्य में पावर-प्रोवाइडिंग राज्यों के साथ टैरिफ (tariff) की नई बातचीत और रेग्युलेटरी अप्रूवल (regulatory approvals) भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे। इस सेक्टर में NTPC, Adani Power और Reliance Power जैसे बड़े खिलाड़ी भी सक्रिय हैं।
