SPML Infra: एनर्जी स्टोरेज में बड़ा दांव! कंपनी ₹190 करोड़ जुटाकर क्षमता करेगी दोगुनी

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AuthorNeha Patil|Published at:
SPML Infra: एनर्जी स्टोरेज में बड़ा दांव! कंपनी ₹190 करोड़ जुटाकर क्षमता करेगी दोगुनी
Overview

SPML Infra ने एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में अपनी धाक जमाने की तैयारी कर ली है। कंपनी के बोर्ड ने **₹190.34 करोड़** तक की राशि जुटाने के लिए प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) को मंजूरी दे दी है। इस पैसे का इस्तेमाल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की क्षमता को दोगुना कर **5 GWh** तक ले जाने के लिए किया जाएगा।

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SPML Infra के बोर्ड का बड़ा फैसला: BESS क्षमता में होगी भारी बढ़ोतरी

23 अप्रैल, 2026 को SPML Infra के डायरेक्टर्स बोर्ड ने अहम फैसला लेते हुए शेयर और वारंट के प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए ₹190.34 करोड़ तक जुटाने को मंजूरी दे दी है। साथ ही, कंपनी ने ₹238.43 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) प्लान को भी हरी झंडी दिखा दी है। इस फंड का इस्तेमाल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की क्षमता को मौजूदा 2.5 GWh से दोगुना बढ़ाकर 5 GWh करने के लिए होगा। इन योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए शेयरहोल्डर की मंजूरी जरूरी होगी, जिसके लिए 16 मई, 2026 को एक एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई गई है।

एनर्जी स्टोरेज में मजबूती की ओर SPML Infra

यह बड़ा कदम SPML Infra को भारत के तेजी से बढ़ते एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। BESS क्षमता को दोगुना करना ग्रिड की स्थिरता और रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स को इंटीग्रेट करने के लिए बेहद अहम है। यह कंपनी की राष्ट्रीय रिन्यूएबल एनर्जी टारगेट्स को पूरा करने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

पिछली योजनाओं का बढ़ा हुआ कदम

यह मौजूदा प्लान अगस्त 2023 में कंपनी की 2.5 GWh BESS फैसिलिटी स्थापित करने की ₹176.43 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर वाली योजना से कहीं बड़ा है। SPML Infra पहले भी फंड मजबूत करने के लिए प्रेफरेंशियल इश्यू का इस्तेमाल कर चुकी है, जिसमें 2022 के अंत में वर्किंग कैपिटल के लिए फंड जुटाना शामिल है।

विस्तार का प्रभाव और जोखिम

इस विस्तार से कंपनी को BESS के लिए बेहतर वित्तीय संसाधन मिलेंगे। एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस के लिए इसकी ऑपरेशनल क्षमता दोगुनी हो जाएगी, जिससे नए प्रोजेक्ट्स मिलने और रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में मार्केट शेयर बढ़ाने की संभावना है। हालांकि, 18 महीनों के भीतर वारंट को इक्विटी में बदलने से मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए डाइल्यूशन (Dilution) का रिस्क भी जुड़ा है।

अहम जोखिम और चुनौतियां

प्रेफरेंशियल इश्यू और वारंट जारी करने के लिए 16 मई, 2026 को होने वाली EGM में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिलना सबसे अहम है। फंड जुटाने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए SEBI और स्टॉक एक्सचेंज से आवश्यक मंजूरी मिलना भी महत्वपूर्ण है। अगले 18 महीनों में वारंट के इक्विटी में बदलने से मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए डाइल्यूशन का खतरा बना रहेगा। SPML Infra को BESS क्षमता बढ़ाने और बढ़े हुए कैपिटल एक्सपेंडिचर को मैनेज करने में एग्जीक्यूशन चुनौतियां पेश आ सकती हैं। पिछली रेगुलेटरी जांचों में 2019 में SEBI द्वारा इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए लगाया गया जुर्माना और 2023 में एन्फोर्समेंट एजेंसियों द्वारा चल रही जांचों की खबरें शामिल हैं।

प्रतिस्पर्धी परिदृश्य

SPML Infra इंफ्रास्ट्रक्चर EPC सेक्टर में काम करती है। Sterling and Wilson Renewable Energy रिन्यूएबल एनर्जी EPC में एक प्रमुख प्रतिस्पर्धी है। Tata Power और Adani Green Energy जैसी कंपनियां भी रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज सॉल्यूशंस में सक्रिय हैं, हालांकि उनके बिजनेस मॉडल अलग हैं। यह विस्तार SPML को BESS सेगमेंट में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य रखता है।

वित्तीय स्थिति पर एक नजर

फाइनेंशियल ईयर 24 (FY24) के लिए SPML Infra ने ₹1161.4 करोड़ का स्टैंडअलोन रेवेन्यू दर्ज किया, जो FY23 की तुलना में मामूली गिरावट है। कंपनी ने FY24 में ₹34.4 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस पोस्ट किया, जो पिछले दो सालों के मुनाफे के विपरीत है। इसके स्टैंडअलोन डेट टू इक्विटी रेश्यो में FY23 के 1.50 से बढ़कर FY24 में 2.38 हो गया, जो बढ़े हुए लीवरेज को दर्शाता है।

आगे क्या देखना अहम होगा?

निवेशक 16 मई, 2026 को होने वाली EGM में शेयरहोल्डर्स के फैसले का इंतजार करेंगे, साथ ही SEBI और स्टॉक एक्सचेंज से मिलने वाली मंजूरी पर भी नजर रखेंगे। BESS क्षमता विस्तार के एग्जीक्यूशन टाइमलाइन के साथ-साथ पिछली जांचों पर किसी भी अपडेट पर भी कंपनी की आगे की राह निर्भर करेगी। फंड जुटाने के बाद कंपनी के भविष्य के वित्तीय प्रदर्शन और लीवरेज लेवल भी महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.