नतीजों पर एक नज़र:
कंपनी के स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों पर गौर करें तो, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही में कुल आय 16.72% घटकर ₹864.15 करोड़ पर आ गई, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹1,037.64 करोड़ थी। तिमाही स्टैंडअलोन मुनाफा 66.69% लुढ़ककर ₹41.45 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल यह ₹124.43 करोड़ था। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें तो स्टैंडअलोन मुनाफा ₹215.97 करोड़ से गिरकर ₹46.59 करोड़ पर आ गया।
गिरावट की वजहें:
इस भारी गिरावट की जड़ें कंपनी के ₹250 करोड़ के ओवरड्यू प्रेफरेंस शेयर (Overdue Preference Shares) और NCLAT में चल रहे एक अहम केस में हैं। यह प्रेफरेंस शेयर दिसंबर 2021 से बकाया हैं, जो कंपनी की लिक्विडिटी (Liquidity) पर सवाल खड़े करते हैं। सब्सिडियरी PPDL से जुड़ा NCLAT केस, जिसे REC ने शुरू किया है, अभी भी अनसुलझा है। कंपनी के पास महाराष्ट्र में थर्मल और सोलर पावर प्लांट्स हैं, लेकिन पहले भी उसे बड़े कर्ज और फाइनेंशियल स्ट्रेस से गुजरना पड़ा है।
आगे क्या असर होगा?
इन सब वजहों से कंपनी का फ्यूचर अनिश्चित बना हुआ है। ₹250 करोड़ के अनपेड प्रेफरेंस शेयर और NCLAT का लंबित मामला कंपनी की वित्तीय सेहत के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। मार्च 2026 तक ₹(732.40) करोड़ का कंसोलिडेटेड निगेटिव अदर इक्विटी (Negative Other Equity) यह दर्शाता है कि कंपनी का नेट वर्थ (Net Worth) काफी घट गया है और इसे संभालने के लिए बड़े टर्नअराउंड (Turnaround) की ज़रूरत है।
पीयर कंपनियों से तुलना:
अगर हम NTPC और JSW Energy जैसे बड़े पावर प्लेयर्स को देखें, तो उनका फाइनेंशियल परफॉरमेंस (Financial Performance) काफी स्थिर और ग्रोथ वाला रहा है। RattanIndia Power के मुकाबले, ये कंपनियां अपने स्केल और फाइनेंस का बेहतर इस्तेमाल कर पा रही हैं।
क्या ट्रैक करें?
आगे चलकर शेयरहोल्डर्स (Shareholders) को NCLAT केस के नतीजे, बकाया प्रेफरेंस शेयर के भुगतान की प्रगति, और मैनेजमेंट की मुनाफा बढ़ाने व निगेटिव इक्विटी को ठीक करने की स्ट्रेटेजी (Strategy) पर बारीकी से नज़र रखनी होगी।
