यह नई क्षमता तीन 3.3 MW की विंड टर्बाइन जनरेटर (WTGs) को मिलाकर बनी है। इस प्रोजेक्ट के लिए ईपीसी (EPC) कॉन्ट्रैक्ट फरवरी 2026 की शुरुआत में साइन किया गया था और अप्रैल 2026 में इसे सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया, जिससे बिजली उत्पादन शुरू हो गया।
यह कदम Orient Green Power की ग्रोथ स्ट्रेटेजी के तहत रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कंपनी की स्थिति को और मजबूत करेगा। इस तरह के प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की क्षमता कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब वह लगातार अपनी बिजली उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही है।
Orient Green Power पहले भी भारत के कई राज्यों में विंड पावर प्रोजेक्ट्स विकसित और ऑपरेट करती रही है, जिसमें तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। हालांकि, कंपनी को प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (Project Execution) और समय पर ग्रिड कनेक्टिविटी (Grid Connectivity) सुनिश्चित करने में पहले भी कुछ चुनौतियां का सामना करना पड़ा है।
इसलिए, निवेशकों की नज़र अब कंपनी की प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन एफिशिएंसी (Project Execution Efficiency) पर रहेगी। इसके अलावा, पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) के तहत बिजली कंपनियों से समय पर पेमेंट मिलना भी रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) के लिए एक अहम फैक्टर है।
बाजार में ReNew Energy Global Plc और Tata Power (Renewables) जैसे बड़े खिलाड़ी भी अपने विंड और सोलर पोर्टफोलियो का तेजी से विस्तार कर रहे हैं, जो अक्सर बड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस करते हैं।
Q3 फाइनेंशियल ईयर 2026 तक, Orient Green Power की कुल ऑपरेशनल विंड कैपेसिटी (Standalone) करीब 500 MW थी। भविष्य में, निवेशक कंपनी की आगे की क्षमता बढ़ोतरी, नए प्रोजेक्ट पाइपलाइन, और नए 9.9 MW कैपेसिटी से जुड़ी फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर बारीकी से नजर रखेंगे।
