ONGC की ESG रेटिंग: कहां खड़ी है कंपनी?
Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के लिए ESGRisk.ai की तरफ से जारी की गई लेटेस्ट ESG असेसमेंट में कंपनी को कुल 49 का स्कोर मिला है, जिसने इसे 'Adequate' यानी 'पर्याप्त' कैटेगरी में रखा है। पब्लिकली अवेलेबल डेटा पर आधारित इस अनसोलिसिटेड (बिना मांगे दी गई) रेटिंग के नतीजे मिले-जुले हैं। जहां एक ओर ONGC ने ह्यूमन राइट्स, एम्प्लॉयमेंट क्वालिटी, बायोडायवर्सिटी इम्पैक्ट, कम्युनिटी एंगेजमेंट और कस्टमर एंगेजमेंट जैसे सोशल एरिया में अच्छी परफॉरमेंस दिखाई है, वहीं रिपोर्ट ने इसके गवर्नेंस और एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज में गंभीर कमजोरियों की ओर इशारा किया है।
गवर्नेंस स्कोर और अन्य चिंताएं
खास तौर पर, ONGC का गवर्नेंस स्कोर 36.02 दर्ज किया गया है, जो चिंता का विषय है। असेसमेंट में ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी, वॉटर पॉल्यूशन, वेस्ट मैनेजमेंट और रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स (RPTs) पर डिस्क्लोजर जैसी चीजों में भी कमजोरियां पाई गई हैं।
'Adequate' ESG रेटिंग का मतलब है कि ONGC अपनी सस्टेनेबिलिटी से जुड़े रिस्क और परफॉरमेंस को एक बेसिक लेवल पर मैनेज कर रहा है, लेकिन इसमें सुधार की काफी गुंजाइश है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गवर्नेंस और एनवायरनमेंटल फैक्टर्स में कम स्कोर, खासकर जब पुराने पेनल्टीज के साथ जुड़ते हैं, तो यह संभावित ऑपरेशनल डिसरप्शन, बढ़ी हुई रेगुलेटरी स्क्रूटनी और रेपुटेशनल डैमेज का संकेत दे सकते हैं।
अतीत के विवाद और पेनल्टीज
ONGC का इतिहास रेगुलेटरी और गवर्नेंस इश्यूज से भरा रहा है। हाल के सालों में, कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज से लिस्टिंग नॉर्म्स, खासकर बोर्ड कंपोजिशन (जैसे इंडिपेंडेंट और वुमन डायरेक्टर्स की कमी) को पूरा न करने के लिए लगातार फाइन (जुर्माने) भरने पड़े हैं। कंपनी इन अपॉइंटमेंट चैलेंजेस के लिए गवर्नमेंट कंट्रोल को जिम्मेदार ठहराती है।
इसके अलावा, ONGC कई गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) डिस्प्यूट्स में भी फंसी रही है। इनमें मार्च 2025 में जारी किया गया ₹22 करोड़ का डिमांड ऑर्डर शामिल है, जो कथित तौर पर ज्वाइंट वेंचर पार्टनर्स के लिए रॉयल्टी पर GST का भुगतान न करने से जुड़ा था। इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में ₹60 लाख का एक्साइज ड्यूटी डिस्क्रिपेंसी के लिए पेनल्टी और 2017 की देनदारियों से संबंधित ₹6.72 करोड़ का IGST डिमांड भी शामिल है।
हाल ही में, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने 2014 से 2020 के बीच ₹1.11 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति रखने के आरोप में एक चीफ इंजीनियर के खिलाफ केस दर्ज किया था, जो कंपनी के गवर्नेंस में कमजोरियों को दर्शाता है।
आगे क्या?
इस ESG रिपोर्ट के बाद, निवेशकों द्वारा ONGC की गवर्नेंस और एनवायरनमेंटल प्रैक्टिसेज पर और अधिक जांच-पड़ताल किए जाने की उम्मीद है। मैनेजमेंट भी ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी और वेस्ट मैनेजमेंट को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। RPT डिस्क्लोजर कंसर्न्स को दूर करने और बोर्ड इंडिपेंडेंस को मजबूत करने पर भी अधिक दबाव देखने को मिल सकता है।
किन रिस्क पर रखनी चाहिए नजर?
निवेशकों को गवर्नेंस लैप्स पर नजर रखनी चाहिए, जैसे कि चीफ इंजीनियर के खिलाफ ₹1.11 करोड़ की रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का मामला, बोर्ड डायरेक्टर अपॉइंटमेंट से जुड़े लगातार इश्यूज जिनके चलते एक्सचेंज फाइन लगाता है, और RPT डिस्क्लोजर पर चिंताएं। महत्वपूर्ण रेगुलेटरी पेनल्टीज और टैक्स डिमांड्स, जिनमें ₹22 करोड़ की GST डिमांड और ₹60 लाख का एक्साइज ड्यूटी पेनल्टी शामिल है, लगातार कंप्लायंस चुनौतियों को उजागर करती हैं। अतीत की गैस लीक और आग की घटनाएं ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी और एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट में संभावित रिस्क को रेखांकित करती हैं।
साथियों के मुकाबले ONGC
ONGC की 'Adequate' ESG रेटिंग इसे एनर्जी सेक्टर के साथियों के बीच एक मिली-जुली स्थिति में रखती है। कोल इंडिया लिमिटेड को FY2025 के लिए 58 का 'Moderate' ESG रेटिंग मिला था। वहीं, ऑयल इंडिया लिमिटेड का CRISIL ESG स्कोर 52 है, जो 'Adequate' कैटेगरी में आता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, हालांकि एक डाइवर्सिफाइड कंपनी है, लेकिन एनवायरनमेंटल और गवर्नेंस चिंताओं के कारण अक्सर इसे कम स्कोर मिलते रहे हैं, जबकि रिन्यूएबल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में इसके बड़े निवेश को भविष्य के लिए सकारात्मक देखा जाता है।
निवेशक ONGC की तरफ से ESGRisk.ai रिपोर्ट पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और पहचानी गई कमजोरियों को दूर करने के लिए किसी भी नियोजित कार्रवाई की निगरानी करेंगे। अन्य एजेंसियों से भविष्य की ESG रेटिंग्स और गवर्नेंस व एनवायरनमेंटल मेट्रिक्स में सुधार के लिए ONGC की अपनी सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
